महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपुत्राः पौत्रा भ्रातरश्चैव ये नः । यं यमेषां मन्यसे येन योग्यं तत् तत् प्रोच्यानामयं सूत वाच्याः ॥ २२ ॥ संजय! इनके सिवा और भी जो कुरुकुलके प्रधान नवयुवक हैं, जो हमारे पुत्र, पौत्र और भाई लगते हैं, इनमेंसे जिस-जिसको तुम जिस व्यवहारके योग्य समझो, उससे वैसी ही बात कहकर उन सबसे बताना कि पाण्डवलोग स्वस्थ और सानन्द हैं ॥ २२ ॥ ये राजानः पाण्डवायोधनाय समानीता धार्तराष्ट्रेण केचित् । वशातयः शाल्वकाः केकयाश्च तथाम्बष्ठा ये त्रिगर्ताश्च मुख्याः ॥ २३ ॥ प्राच्योदीच्या दाक्षिणात्याश्च शूरा- स्तथा प्रतीच्याः पर्वतीयाश्च सर्वे । अनृशंसाः शीलवृत्तोपपन्ना- स्तेषां सर्वेषां कुशलं सूत पृच्छेः ॥ २४ ॥ दुर्योधनने हम पाण्डवोंके साथ युद्ध करनेके लिये जिन-जिन राजाओंको बुलाया है। वे वशाति, शाल्व, केकय, अम्बष्ठ तथा त्रिगर्तदेशके प्रधान वीर, पूर्व, उत्तर, दक्षिण और पश्चिम दिशाके शौर्यसम्पन्न योद्धा तथा समस्त पर्वतीय नरेश वहाँ उपस्थित हैं। वे लोग दयालु तथा शील और सदाचारसे सम्पन्न हैं। संजय! तुम मेरी ओरसे उन सबका कुशल-मंगल पूछना ॥ २३-२४ ॥ हस्त्यारोहा रथिनः सादिनश्च पदातयश्चार्यसङ्घा महान्तः । आख्याय मां कुशलिनं स्म नित्य- मनामयं परिपृच्छेः समग्रान् ॥ २५ ॥ जो हाथीसवार, रथी, घुड़सवार, पैदल तथा बड़े-बड़े सज्जनोंके समुदाय वहाँ उपस्थित हैं, उन सबसे मुझे सकुशल बताकर उनका भी आरोग्य-समाचार पूछना ॥ २५ ॥ तथा राज्ञो ह्यर्थयुक्तानमात्यान् दौवारिकान् ये च सेनां नयन्ति । आयव्ययं ये गणयन्ति नित्य- मर्थांश्च ये महतश्चिन्तयन्ति ॥ २६ ॥ जो राजाके हितकर कार्योंमें लगे हुए मन्त्री, द्वारपाल, सेनानायक, आय-व्ययनिरीक्षक तथा निरन्तर बड़े-बड़े कार्यों एवं प्रश्नोंपर विचार करनेवाले हैं, उनसे भी कुशल-समाचार पूछना ॥ २६ ॥ वृन्दारकं कुरुमध्येष्वमूढं