भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2218

प्रजानाथ! रणक्षेत्रमें आपके पुत्र पितामहके उस कर्मको देखकर अत्यन्त आश्चर्यमें पड़ गये और उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे ।। ३७ ।।

पार्था विमनसो भूत्वा प्रैक्षन्त पितरं तव ।। ३८ ।। युध्यमानं रणे शूरं विप्रचित्तिमिवामराः । उस समय कुन्तीके पुत्र खिन्नचित्त होकर रणक्षेत्रमें युद्ध करते हुए आपके ताऊ शूरवीर भीष्मकी ओर उसी प्रकार देखने लगे, जैसे देवता विप्रचित्ति नामक दानवको देखते हैं ।। ३८ १/२ ।।

न चैनं वारयामासुर्व्यात्ताननमिवान्तकम् ।। ३९ ।। दशमेऽहनि सम्प्राप्ते रथानीकं शिखण्डिनः । अदहन्निशितैर्बाणैः कृष्णवर्त्मेव काननम् ।। ४० ।। वे मुँह फैलाये हुए कालके समान भीष्मको रोक न सके। दसवाँ दिन आनेपर भीष्म जैसे दावाग्नि वनको जला देती है, उसी प्रकार शिखण्डीकी रथसेनाको तीखे बाणोंकी आगमें भस्म करने लगे ।। ३९-४० ।।

तं शिखण्डी त्रिभिर्बाणैरभ्यविध्यत् स्तनान्तरे । आशीविषमिव क्रुद्धं कालसृष्टमिवान्तकम् ।। ४१ ।। तब शिखण्डीने तीन बाणोंसे भीष्मकी छातीमें प्रहार किया। उस समय वे कालप्रेरित मृत्यु तथा क्रोधमें भरे हुए विषधर सर्पके समान जान पड़ते थे ।। ४१ ।।

स तेनातिभृशं विद्धः प्रेक्ष्य भीष्मः शिखण्डिनम् । अनिच्छन्निव संक्रुद्धः प्रहसन्निदमब्रवीत् ।। ४२ ।। शिखण्डीके द्वारा अत्यन्त घायल हो भीष्म उसकी ओर देखकर अत्यन्त कुपित हो बिना इच्छाके ही हँसते हुए इस प्रकार बोले— ।। ४२ ।।

काममभ्यस वा मा वा न त्वां योत्स्ये कथंचन । यैव हि त्वं कृता धात्रा सैव हि त्वं शिखण्डिनी ।। ४३ ।। ‘अरे, तू इच्छानुसार प्रहार कर या न कर। मैं तेरे साथ किसी तरह युद्ध नहीं करूँगा। विधाताने जिस रूपमें तुझे उत्पन्न किया था, तू वही शिखण्डिनी है’ ।। ४३ ।।

तस्य तद् वचनं श्रुत्वा शिखण्डी क्रोधमूर्च्छितः । उवाचैनं तथा भीष्मं सृक्किणी परिसंलिहन् ।। ४४ ।। उनकी यह बात सुनकर शिखण्डी क्रोधसे मूर्च्छित-सा हो गया और अपने मुँहके कोनोंको चाटता हुआ भीष्मसे इस प्रकार बोला— ।। ४४ ।।

जानामि त्वां महाबाहो क्षत्रियाणां क्षयंकर । मया श्रुतं च ते युद्धं जामदग्न्येन वै सह ।। ४५ ।। ‘क्षत्रियोंका विनाश करनेवाले महाबाहु भीष्म! मैं भी आपको जानता हूँ। मैंने सुना है कि आपने जमदग्निनन्दन परशुरामजीके साथ युद्ध किया था ।। ४५ ।।

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