महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2234, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंपीड़्यमानो बलवता पुत्रस्तव विशाम्पते । विव्याध समरे पार्थं कङ्कपत्त्रैः शिलाशितैः ॥ ३८ ॥ प्रजानाथ! बलवान् अर्जुनके द्वारा पीड़ित होनेपर आपके पुत्रने शानपर चढ़ाकर तेज किये हुए कंक-पत्रयुक्त बाणोंद्वारा समरभूमिमें उन कुन्तीकुमारको बींध डाला ॥ ३८ ॥
तस्य पार्थो धनुश्छित्त्वा रथं चास्य त्रिभिः शरैः । आजघान ततः पश्चात् पुत्रं ते निशितैः शरैः ॥ ३९ ॥ तब अर्जुनने तीन बाणोंसे दुःशासनके रथ और धनुषको छिन्न-भिन्न करके आपके उस पुत्रको पैने बाणोंद्वारा अच्छी तरह घायल किया ॥ ३९ ॥
सोऽन्यत् कार्मुकमादाय भीष्मस्य प्रमुखे स्थितः । अर्जुनं पञ्चविंशत्या बाह्वोरुरसि चार्पयत् ॥ ४० ॥ तब दुःशासनने दूसरा धनुष ले भीष्मके सामने खड़े होकर अर्जुनकी दोनों भुजाओं और छातीमें पचीस बाण मारे ॥ ४० ॥
तस्य क्रुद्धो महाराज पाण्डवः शत्रुतापनः । अप्रेषीद् विशिखान् घोरान् यमदण्डोपमान् बहून् ॥ ४१ ॥ महाराज! तब शत्रुओंको संताप देनेवाले पाण्डुनन्दन अर्जुनने कुपित हो दुःशासनपर यमदण्डके समान भयंकर बहुत-से बाण चलाये ॥ ४१ ॥
अप्राप्तानेव तान् बाणांश्छिच्छेद तनयस्तव । यतमानस्य पार्थस्य तदद्भुतमिवाभवत् ॥ ४२ ॥ परंतु आपके पुत्रने अर्जुनके प्रयत्नशील होते हुए भी उन बाणोंको अपने पास आनेके पहले ही काट डाला। वह एक अद्भुत-सी बात थी ॥ ४२ ॥
पार्थं च निशितैर्बाणैर्विध्यत् तनयस्तव । ततः क्रुद्धो रणे पार्थः शरान् संधाय कार्मुके ॥ ४३ ॥ प्रेषयामास समरे स्वर्णपुङ्खाञ्छिलाशितान् । बाणोंको काटनेके पश्चात् आपके पुत्रने कुन्तीकुमार अर्जुनको तीखे बाणोंद्वारा बींध डाला, तब रणक्षेत्रमें अर्जुनने कुपित होकर अपने धनुषपर स्वर्णमय पंखसे युक्त एवं शिलापर रगड़कर तेज किये हुए बाणोंका संधान किया और उन्हें दुःशासनपर चलाया ॥ ४३ १/२ ॥
न्यमज्जंस्ते महाराज तस्य काये महात्मनः ॥ ४४ ॥ यथा हंसा महाराज तडागं प्राप्य भारत । महाराज! भरतनन्दन! जैसे हंस तालाबमें पहुँचकर उसके भीतर गोते लगाते हैं, उसी प्रकार वे बाण महामना दुःशासनके शरीरमें धँस गये ॥ ४४ १/२ ॥
पीडितश्चैव पुत्रस्ते पाण्डवेन महात्मना ॥ ४५ ॥ हित्वा पार्थं रणे तूर्णं भीष्मस्य रथमाव्रजत् ।