भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2255

भीमसेनं समुद्दिश्य प्रेषयामासुरोजसा ॥ ४० ॥

इनके सिवा दूसरे धनुर्धर वीरोंने भी भीमसेनको लक्ष्य करके बलपूर्वक पाँच-पाँच बाण

चलाये ॥ ४० ॥

तोमरं च द्विधा चक्रे क्षुरप्रेणानिलात्मजः ।

पट्टिशं च त्रिभिर्बाणैश्चिच्छेद तिलकाण्डवत् ॥ ४१ ॥

परंतु वायुपुत्र भीमसेनने एक क्षुरप्रसे जयद्रथके चलाये हुए तोमरके दो टुकड़े कर दिये;

फिर तीन बाण मारकर पट्टिशको तिलके डंठलके समान टूक-टूक कर डाला ॥ ४१ ॥

स बिभेद शतघ्नीं च नवभिः कङ्कपत्रिभिः ।

मद्रराजप्रयुक्तं च शरं छित्त्वा महारथः ॥ ४२ ॥

शक्तिं चिच्छेद सहसा भगदत्तेरितां रणे ।

तत्पश्चात् कंकपत्रयुक्त नौ बाणोंद्वारा शतघ्नीको छिन्न-भिन्न कर दिया। इसके बाद

महारथी भीमसेनने मद्रराज शल्यके चलाये हुए बाणको काटकर रणक्षेत्रमें भगदत्तकी

चलायी हुई शक्तिके भी सहसा टुकड़े-टुकड़े कर डाले ॥ ४२ ½ ॥

तथेतराञ्छरान् घोरान् शरैः संनतपर्वभिः ॥ ४३ ॥

भीमसेनो रणश्लाघी त्रिधैकैकं समाच्छिनत् ।

तांश्च सर्वान् महेष्वासांस्त्रिभिस्त्रिभिरताडयत् ॥ ४४ ॥

तदनन्तर झुकी हुई गाँठवाले बहुत-से बाणोंद्वारा अन्यान्य योद्धाओंके चलाये हुए

भयंकर शरसमूहोंको भी युद्धकी श्लाघा रखनेवाले भीमसेनने काटकर एक-एकके तीन-

तीन टुकड़े कर दिये। इस प्रकार शत्रुओंके अस्त्र-शस्त्रोंका निवारण करके भीमसेनने उन

सभी महाधनुर्धर वीरोंको तीन-तीन बाणोंसे घायल कर दिया ॥

ततो धनंजयस्तत्र वर्तमाने महारणे ।

आजगाम रथेनाजौ भीमं दृष्ट्वा महारथम् ॥ ४५ ॥

निघ्नन्तं समरे शत्रून् योधयानं च सायकैः ।

तब उस महासमरमें महारथी भीमसेनको, जो समरभूमिमें सायकोंद्वारा शत्रुओंका

संहार करते हुए उनके साथ युद्ध कर रहे थे, देखकर रथके द्वारा अर्जुन भी वहीं आ

पहुँचे ॥ ४५ ½ ॥

तौ तु तत्र महात्मानौ समेतौ वीक्ष्य पाण्डवौ ॥ ४६ ॥

न शशंसुर्जयं तत्र तावकाः पुरुषर्षभाः ।

उन दोनों महामनस्वी पाण्डव बन्धुओंको एकत्र हुआ देख आपकी सेनाके श्रेष्ठ पुरुषोंने

वहाँ अपनी विजयकी आशा त्याग दी ॥ ४६ ½ ॥

अथार्जुनो रणे भीमं योधयन्तं महारथान् ॥ ४७ ॥

भीष्मस्य निधनाकाङ्क्षी पुरस्कृत्य शिखण्डिनम् ।

आससाद रणे वीरांस्तावकान् दश भारत ॥ ४८ ॥