भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2280

उस समय लोगोंने भीष्मका अद्भुत पराक्रम देखकर यह मान लिया कि युद्धके मैदानमें जितने योद्धा उपस्थित हैं, वे सब यमराजके लोकमें गये हुएके ही समान हैं ।। ७८ १/२ ।।

न कश्चिदेनं समरे प्रत्युद्याति महारथः ।। ७९ ।।
ऋते पाण्डुसुतं वीरं श्वेताश्वं कृष्णसारथिम् ।
शिखण्डिनं च समरे पाञ्चाल्यममितौजसम् ।। ८० ।।

उस समय श्रीकृष्ण जिनके सारथि थे और श्वेत घोड़े जिनके रथमें जुते हुए थे, उन पाण्डुनन्दन वीर अर्जुनको तथा अमित तेजस्वी पांचालराजपुत्र शिखण्डीको छोड़कर दूसरा कोई महारथी ऐसा नहीं था, जो समरांगणमें भीष्मके सामने जानेका साहस करता ।। ७९-८० ।।

इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि संकुलयुद्धे
षोडशाधिकशततमोऽध्यायः ।। ११६ ।।

इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें संकुलयुद्धविषयक एक सौ सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। ११६ ।।