महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविरोचन उवाच
तथा भद्रे करिष्यामि यथा त्वं भीरु भाषसे । सुधन्वानं च मां चैव प्रातर्द्रष्टासि संगतौ ।। ११ ।। विरोचन बोला— कल्याणी! तुम जैसा कहती हो, वही करूँगा। भीरु! प्रातःकाल तुम मुझे और सुधन्वाको एक साथ उपस्थित देखोगी ।। ११ ।।
विदुर उवाच
अतीतायां च शर्वर्यामुदिते सूर्यमण्डले । अथाजगाम तं देशं सुधन्वा राजसत्तम । विरोचनो यत्र विभो केशिन्या सहितः स्थितः ।। १२ ।। विदुरजी कहते हैं— राजाओंमें श्रेष्ठ धृतराष्ट्र! इसके बाद जब रात बीती और सूर्यमण्डलका उदय हुआ, उस समय सुधन्वा उस स्थानपर आया, जहाँ विरोचन केशिनीके साथ उपस्थित था ।। १२ ।।
सुधन्वा च समागच्छत् प्राह्लादिं केशिनीं तथा । समागतं द्विजं दृष्ट्वा केशिनी भरतर्षभ । प्रत्युत्थायासनं तस्मै पाद्यमर्घ्यं ददौ पुनः ।। १३ ।।