भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 439

संजय! मुझे अमर्षमें भरे हुए शूरवीर भीमसेनका समाचार सुनाओ। मैं तो यही सबसे बड़ा लाभ मानता हूँ कि उस शत्रुघाती मनस्वी वीरने (जब द्यूतक्रीड़ा हो रही थी) उसी समय मेरे सब पुत्रोंको नहीं मार डाला ।। १५ १/२ ।।

येन भीमबला यक्षा राक्षसाश्च पुरा हताः ।। १६ ।। कथं तस्य रणे वेगं मानुषः प्रसहिष्यति । जिसने पूर्वकालमें भयंकर बलशाली यक्षों तथा राक्षसोंका वध किया है, युद्धमें उसका वेग कोई मनुष्य कैसे सह सकेगा? ।। १६ १/२ ।।

न स जातु वशे तस्थौ मम बाल्येऽपि संजय ।। १७ ।। किं पुनर्मम दुष्पुत्रैः क्लिष्टः सम्प्रति पाण्डवः । संजय! पाण्डुकुमार भीमसेन बचपनमें भी कभी मेरे वशमें नहीं रहा; फिर जब मेरे दुष्ट पुत्रोंने उसे बार-बार कष्ट दिया है, तब वह इस समय मेरे वशमें कैसे हो सकता है? ।। १७ १/२ ।।

निष्ठुरो रोषणोऽत्यर्थं भज्येतापि न संनमेत् । तिर्यक्प्रेक्षी संहतभ्रूः कथं शाम्येद् वृकोदरः ।। १८ ।। वह क्रूर और क्रोधी है। टूट भले ही जाय, पर झुक नहीं सकेगा। सदा टेढ़ी निगाहसे ही देखता है। उसकी भौंहें क्रोधके कारण परस्पर गुँथी रहती हैं। ऐसा भीमसेन कैसे शान्त हो सकेगा? ।। १८ ।।

शूरस्तथाप्रतिबलो गौरस्ताल इवोन्नतः । प्रमाणतो भीमसेनः प्रादेशेनाधिकोऽर्जुनात् ।। १९ ।। गोरे रंगका वह शूरवीर भीमसेन ताड़के समान ऊँचा है। ऊँचाईमें वह अर्जुनसे एक बित्ता अधिक है, बलमें उसकी समता करनेवाला दूसरा कोई नहीं है ।। १९ ।।

जवेन वाजिनोऽत्येति बलेनात्येति कुञ्जरान् । अव्यक्तजल्पी मध्वक्षो मध्यमः पाण्डवो बली ।। २० ।। वह स्पष्ट नहीं बोलता। उसकी आँखें सदा मधुके समान पिंगलवर्णकी दिखायी देती हैं। वह महाबली मध्यम पाण्डव अपने वेगसे घोड़ोंको भी लाँघ सकता है और बलसे हाथियोंको भी पराजित कर सकता है ।। २० ।।

इति बाल्ये श्रुतः पूर्वं मया व्यासमुखात् पुरा । रूपतो वीर्यतश्चैव याथातथ्येन पाण्डवः ।। २१ ।। मैंने बाल्यकालमें ही व्यासजीके मुखसे पहले इस पाण्डुपुत्रके अद्भुत रूप और पराक्रमका यथार्थ वर्णन सुना था ।। २१ ।।

आयसेन स दण्डेन रथान् नागान् नरान् हयान् । हनिष्यति रणे क्रुद्धो रौद्रः क्रूरपराक्रमः ।। २२ ।।