भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 467

भीमसेने च निहते कोऽन्यो युध्येत भारत ॥ ६० ॥ परेषां तन्ममाचक्ष्व यदि वेत्थ परंतप । शत्रुओंको संताप देनेवाले भरतनन्दन! अर्जुन और भीमसेनके मारे जानेपर शत्रुओंके दलमें दूसरा कौन ऐसा वीर है, जो युद्ध कर सकेगा? यदि आप किसीको जानते हों तो बताइये ॥ ६० १/२ ॥

पञ्च ते भ्रातरः सर्वे धृष्टद्युम्नोऽथ सात्यकिः ॥ ६१ ॥ परेषां सप्त ये राजन् योधाः सारं बलं मतम् । राजन्! पाँचों भाई पाण्डव, धृष्टद्युम्न और सात्यकि—ये कुल सात योद्धा ही शत्रु-पक्षके सारभूत बल माने जाते हैं ॥ ६१ १/२ ॥

अस्माकं तु विशिष्टा ये भीष्मद्रोणकृपादयाः ॥ ६२ ॥ द्रौणिर्वैकर्तनः कर्णः सोमदत्तोऽथ बाह्निकः । प्राग्ज्योतिषाधिपः शल्य आवन्त्यौ च जयद्रथः ॥ ६३ ॥ दुःशासनो दुर्मुखश्च दुःसहश्च विशाम्पते । श्रुतायुश्चित्रसेनश्च पुरुमित्रो विविंशतिः ॥ ६४ ॥ शलो भूरिश्रवाश्चैव विकर्णश्च तवात्मजः । प्रजानाथ! हमलोगोंके पक्षमें जो विशिष्ट योद्धा हैं, उनकी संख्या अधिक है; यथा—भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य आदि, अश्वत्थामा, वैकर्तन कर्ण, सोमदत्त, बाह्निक, प्राग्ज्योतिषनरेश भगदत्त, शल्य, अवन्तीके दोनों राजकुमार विन्द और अनुविन्द, जयद्रथ, दुःशासन, दुर्मुख, दुःसह, श्रुतायु, चित्रसेन, पुरुमित्र, विविंशति, शल, भूरिश्रवा तथा आपका पुत्र विकर्ण। (इस प्रकार अपने पक्षके प्रमुख वीरोंकी संख्या शत्रुओंके प्रमुख वीरोंसे तीन गुनी अधिक है) ॥ ६२—६४ १/२ ॥

अक्षौहिण्यो हि मे राजन् दशैका च समाहृताः । न्यूनाः परेषां सप्तैव कस्मान्मे स्यात् पराजयः ॥ ६५ ॥ महाराज! अपने यहाँ ग्यारह अक्षौहिणी सेनाएँ संगृहीत हो गयी हैं, परंतु शत्रुओंके पक्षमें हमसे बहुत कम कुल सात अक्षौहिणी सेनाएँ हैं; फिर मेरी पराजय कैसे हो सकती है? ॥ ६५ ॥

बलं त्रिगुणतो हीनं योध्यं प्राह बृहस्पतिः । परेभ्यस्त्रिगुणा चेयं मम राजन्ननीकिनी ॥ ६६ ॥ राजन्! बृहस्पतिका कथन है कि शत्रुओंकी सेना अपनेसे एक तिहाई भी कम हो तो उसके साथ अवश्य युद्ध करना चाहिये। परंतु मेरी यह सेना तो शत्रुओंकी अपेक्षा चार अक्षौहिणी अधिक है, इसलिये यह अन्तर मेरी सम्पूर्ण सेनाकी एक तिहाईसे भी अधिक है ॥ ६६ ॥

गुणहीनं परेषां च बहु पश्यामि भारत ।