महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 476, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्राच्याश्च दाक्षिणात्याश्च भीमसेनस्य भागतः ॥ १४ ॥ अपने सौ भाइयों तथा पुत्रोंसहित दुर्योधन और पूर्व एवं दक्षिण-दिशाके कौरवसैनिक भीमसेनका भाग नियत किये गये हैं ॥ १४ ॥
अर्जुनस्य तु भागेन कर्णो वैकर्तनो मतः । अश्वत्थामा विकर्णश्च सैन्धवश्च जयद्रथः ॥ १५ ॥ वैकर्तन कर्ण, अश्वत्थामा, विकर्ण और सिंधुराज जयद्रथ—ये सब अर्जुनके हिस्सेमें पड़े हैं ॥ १५ ॥
अशक्याश्चैव ये केचित् पृथिव्यां शूरमानिनः । सर्वांस्तानर्जुनः पार्थः कल्पयामास भागतः ॥ १६ ॥ इनके सिवा और भी अपनेको शूरवीर माननेवाले जो कोई नरेश इस भूमण्डलमें अजेय माने जाते हैं, उन सबको कुन्तीकुमार अर्जुनने अपना भाग निश्चित किया है ॥ १६ ॥
महेष्वासा राजपुत्रा भ्रातरः पञ्च केकयाः । केकयानेव भागेन कृत्वा योत्स्यन्ति संयुगे ॥ १७ ॥ पाँच भाई केकयराजकुमार भी महान् धनुर्धर हैं। वे समरांगणमें अपने विरोधी केकयदेशीय योद्धाओंको ही अपना भाग (वध्य वैरी) मानकर युद्ध करेंगे ॥ १७ ॥
तेषामेव कृतो भागो मालवाः शाल्वकास्तथा । त्रिगर्तानां चैव मुख्यौ यौ तौ संशप्तकाविति ॥ १८ ॥ मालव, शाल्व तथा त्रिगर्तदेशके सैनिक और संशप्तक—सेनाके दो प्रमुख वीर भी उन केकयराज-कुमारोंके ही भाग नियत किये गये हैं ॥ १८ ॥
दुर्योधनसुताः सर्वे तथा दुःशासनस्य च । सौभद्रेण कृतो भागो राजा चैव बृहद्बलः ॥ १९ ॥ दुर्योधन तथा दुःशासनके सभी पुत्र और राजा बृहद्बल सुभद्रानन्दन अभिमन्युके हिस्सेमें पड़े हैं ॥ १९ ॥
द्रौपदेया महेष्वासाः सुवर्णविकृतध्वजाः । धृष्टद्युम्नमुखा द्रोणमभियास्यन्ति भारत ॥ २० ॥ भरतनन्दन! सुवर्णनिर्मित ध्वजाओंसे युक्त महाधनुर्धर द्रौपदीपुत्र भी धृष्टद्युम्नके साथ द्रोणपर आक्रमण करेंगे ॥
चेकितानः सोमदत्तं द्वैरथे योद्धुमिच्छति । भोजं तु कृतवर्माणं युयुधानो युयुत्सति ॥ २१ ॥ चेकितान द्वैरथ-संग्राममें सोमदत्तके साथ युद्ध करना चाहते हैं। सात्यकि भोजवंशी कृतवर्माके साथ युद्ध करनेको उत्सुक हैं ॥ २१ ॥
सहदेवस्तु माद्रेयः शूरः संक्रन्दनो युधि । स्वमंशं कल्पयामास श्यालं ते सुबलात्मजम् ॥ २२ ॥