भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 689

भरतभूषण! आपको ही पाण्डवोंकी सदा रक्षा करनी चाहिये। विशेषतः संकटके अवसरपर तो आपके लिये उनकी रक्षा अत्यन्त आवश्यक है ही। कहीं ऐसा न हो कि पाण्डवोंसे वैर बाँधनेके कारण आपके धर्म और अर्थ दोनों नष्ट हो जायँ ।। ३९ ।। आहुस्त्वां पाण्डवा राजन्नभिवाद्य प्रसाद्य च । भवतः शासनाद् दुःखमनुभूतं सहानुगैः ॥ ४० ॥ राजन्! पाण्डवोंने आपको प्रणाम करके प्रसन्न करते हुए यह संदेश कहलाया है—‘तात! आपकी आज्ञासे अनुचरोंसहित हमने भारी दुःख सहन किया है ।। ४० ।। द्वादशेमानि वर्षाणि वने निर्व्युषितानि नः । त्रयोदशं तथाज्ञातैः सजने परिवत्सरम् ॥ ४१ ॥ ‘बारह वर्षोंतक हमने निर्जन वनमें निवास किया है और तेरहवाँ वर्ष जनसमुदायसे भरे हुए नगरमें अज्ञात रहकर बिताया है ।। ४१ ।। स्थाता नः समये तस्मिन् पितेति कृतनिश्चयाः । नाहास्म समयं तात तच्च नो ब्राह्मणा विदुः ॥ ४२ ॥ ‘तात! आप हमारे ज्येष्ठ पिता हैं, अतः हमारे विषयमें की हुई अपनी प्रतिज्ञापर डटे रहेंगे (अर्थात् वनवाससे लौटनेपर हमारा राज्य हमें प्रसन्नतापूर्वक लौटा देंगे)—ऐसा निश्चय करके ही हमने वनवास और अज्ञातवासकी शर्तको कभी नहीं तोड़ा है, इस बातको हमारे साथ रहे हुए ब्राह्मणलोग जानते हैं ।। ४२ ।। तस्मिन् नः समये तिष्ठ स्थितानां भरतर्षभ । नित्यं संक्लेशिता राजन् स्वराज्यांशं लभेमहि ॥ ४३ ॥ ‘भरतवंशशिरोमणे! हम उस प्रतिज्ञापर दृढ़तापूर्वक स्थित रहे हैं; अतः आप भी हमारे साथ की हुई अपनी प्रतिज्ञापर डटे रहें। राजन्! हमने सदा क्लेश उठाया है; अब हमें हमारा राज्यभाग प्राप्त होना चाहिये ।। ४३ ।। त्वं धर्ममर्थं संजानन् सम्यङ्नस्त्रातुमर्हसि । गुरुत्वं भवति प्रेक्ष्य बहून् क्लेशांस्तितिक्षमहे ॥ ४४ ॥ स भवान् मातृपितृवदस्मासु प्रतिपद्यताम् । ‘आप धर्म और अर्थके ज्ञाता हैं; अतः हमलोगोंकी रक्षा कीजिये। आपमें गुरुत्व देखकर— आप गुरुजन हैं, यह विचार करके (आपकी आज्ञाका पालन करनेके लिये) हम बहुत-से क्लेश चुपचाप सहते जा रहे हैं; अब आप भी हमारे ऊपर माता-पिताकी भाँति स्नेहपूर्ण बर्ताव कीजिये ।। ४४ १/२ ।। गुरोर्गरीयसी वृत्तिर्या च शिष्यस्य भारत ॥ ४५ ॥ वर्तामहे त्वयि च तां त्वं च वर्तस्व नस्तथा ।