महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशल्य बोले— राजन्! इन्द्रके ऐसा कहनेपर ऋषियोंसहित सम्पूर्ण देवता सबके शरणदाता अत्यन्त बलशाली भगवान् विष्णुकी शरणमें गये ॥ ५ ॥ ऊचुश्च सर्वे देवेशं विष्णुं वृत्रभयार्दिताः । त्रयो लोकास्त्वया क्रान्तास्त्रिभिर्विक्रमणैः पुरा ॥ ६ ॥ वे सब-के-सब वृत्रासुरके भयसे पीड़ित थे। उन्होंने देवेश्वर भगवान् विष्णुसे इस प्रकार कहा—'प्रभो! आपने पूर्वकालमें अपने तीन डगोंद्वारा सम्पूर्ण त्रिलोकी-को माप लिया था ॥ ६ ॥
अमृतं चाहृतं विष्णो दैत्याश्च निहता रणे । बलिं बद्ध्वा महादैत्यं शक्रो देवाधिपः कृतः ॥ ७ ॥ 'विष्णो! आपने ही (मोहिनी अवतार धारण करके) दैत्योंके हाथसे अमृत छीना एवं युद्धमें उन सबका संहार किया तथा महादैत्य बलिको बाँधकर इन्द्रको देवताओंका राजा बनाया ॥ ७ ॥ त्वं प्रभुः सर्वदेवानां त्वया सर्वमिदं ततम् । त्वं हि देवो महादेव सर्वलोकनमस्कृतः ॥ ८ ॥