भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 926

‘अतः श्रीकृष्ण! आप सब लोग इस युद्धमें दुर्योधन आदि समस्त राजाओंका वध कर डालेंगे, इसमें मुझे संशय नहीं है ।। ३८ ।।

नकुलः सहदेवश्च सात्यकिश्च महारथः । शुक्लकेयूरकण्ठत्राः शुक्लमाल्याम्बरावृताः ।। ३९ ।। अधिरूढा नरव्याघ्रा नरवाहनमुत्तमम् । त्रय एते मया दृष्टाः पाण्डुरच्छत्रवाससः ।। ४० ।।

‘नकुल, सहदेव तथा महारथी सात्यकि—ये तीन नरश्रेष्ठ मुझे स्वप्नमें श्वेत भुजबन्द, श्वेत कण्ठहार, श्वेत वस्त्र और श्वेत मालाओंसे विभूषित हो उत्तम नरयान (पालकी)-पर चढ़े दिखायी दिये हैं। ये तीनों ही श्वेत छत्र और श्वेत वस्त्रोंसे सुशोभित थे ।। ३९-४० ।।

श्वेतोष्णीषाश्च दृश्यन्ते त्रय एते जनार्दन । धार्तराष्ट्रेषु सैन्येषु तान् विजानीहि केशव ।। ४१ ।। अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः । रक्तोष्णीषाश्च दृश्यन्ते सर्वे माधव पार्थिवाः ।। ४२ ।।

‘जनार्दन! दुर्योधनकी सेनाओंमेंसे मुझे तीन ही व्यक्ति स्वप्नमें श्वेत पगड़ीसे सुशोभित दिखायी दिये हैं। केशव! आप उनके नाम मुझसे जान लें। वे हैं—अश्वत्थामा, कृपाचार्य और यादव कृतवर्मा। माधव! अन्य सब नरेश मुझे लाल पगड़ी धारण किये दिखायी दिये हैं ।। ४१-४२ ।।

उष्ट्रप्रयुक्तमारूढौ भीष्मद्रोणौ महारथौ । मया सार्धं महाबाहो धार्तराष्ट्रेण वा विभो ।। ४३ ।। अगस्त्यशास्तां च दिशं प्रयाताः स्म जनार्दन । अचिरेणैव कालेन प्राप्स्यामो यमसादनम् ।। ४४ ।।

‘महाबाहु जनार्दन! मैंने स्वप्नमें देखा, भीष्म और द्रोणाचार्य दोनों महारथी मेरे तथा दुर्योधनके साथ ऊँट जुते हुए रथपर आरूढ़ हो दक्षिण दिशाकी ओर जा रहे थे। विभो! इसका फल यह होगा कि हमलोग थोड़े ही दिनोंमें यमलोक पहुँच जायँगे ।। ४३-४४ ।।

अहं चान्ये च राजानो यच्च तत् क्षत्रमण्डलम् । गाण्डीवाग्निं प्रवेक्ष्याम इति मे नास्ति संशयः ।। ४५ ।।

‘मैं' अन्यान्य नरेश तथा वह सारा क्षत्रियसमाज सब-के-सब गाण्डीवकी अग्निमें प्रवेश कर जायँगे, इसमें संशय नहीं है ।। ४५ ।।

श्रीकृष्ण उवाच

उपस्थितविनाशैयं नूनमद्य वसुन्धरा । यथा हि मे वचः कर्ण नोपैति हृदयं तव ।। ४६ ।।

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