महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 989, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंलिये उनका भेदन करना अत्यन्त कठिन था। वे सब-के-सब नगरोंकी भाँति सुरक्षित थे॥ १४-१५॥
यथा रथास्तथा नागा बद्धकक्षाः स्वलंकृताः।
बभूवुः सप्तपुरुषा रत्नवन्त इवाद्रयः॥ १६॥
जिस प्रकार रथ सजाये गये थे, उसी प्रकार हाथियोंको भी स्वर्णमालाओंसे सुसज्जित किया गया था। उन सबको रस्सोंसे कसा गया था। उनपर सात-सात पुरुष बैठे हुए थे, जिससे वे हाथी रत्नयुक्त पर्वतोंके समान जान पड़ते थे॥ १६॥
द्वावङ्कुशधरौ तत्र द्वावुत्तमधनुर्धरौ।
द्वौ वरासिधरौ राजन्नेकः शक्तिपिनाकधृक्॥ १७॥
राजन्! उनमेंसे दो पुरुष अंकुश लेकर महावतका काम करते थे, दो उत्तम धनुर्धर योद्धा थे, दो पुरुष अच्छी तलवारें लिये रहते थे और एक पुरुष शक्ति तथा त्रिशूल धारण करता था॥ १७॥
गजैर्मत्तः समाकीर्णं सर्वमायुधकोशकैः।
तद् बभूव बलं राजन् कौरव्यस्य महात्मनः॥ १८॥
राजन्! महामना दुर्योधनकी वह सारी सेना ही अस्त्र-शस्त्रोंके भण्डारसे युक्त मदमत्त गजराजोंसे व्याप्त हो रही थी॥ १८॥
आमुक्तकवचैर्युक्तैः सपताकैः स्वलङ्कृतैः।
सादिभिश्चोपपन्नास्तु तथा चायुतशो हयाः॥ १९॥
इसी प्रकार कवचधारी, युद्धके लिये उद्यत, आभूषणोंसे विभूषित तथा पताकाधारी सवारोंसे युक्त हजारों-लाखों घोड़े उस सेनामें मौजूद थे॥ १९॥
असंग्राहाः सुसम्पन्ना हेमभाण्डपरिच्छदाः।
अनेकशतसाहस्राः सर्वे सादिवशे स्थिताः॥ २०॥
वे घोड़े उछल-कूद मचाने आदि दोषोंसे रहित होनेके कारण सदा अपने सवारोंके वशमें रहते थे। उन्हें अच्छी शिक्षा मिली थी। वे सुनहरे साजोंसे सुसज्जित थे। उनकी संख्या कई लाख थी॥ २०॥
नानारूपविकाराश्च नानाकवचशस्त्रिणः।
पदातिनो नरास्तत्र बभूवुर्हेममालिनः॥ २१॥
उस सेनामें जो पैदल मनुष्य थे, वे भी सोनेके हारोंसे अलंकृत थे। उनके रूप-रंग, कवच और अस्त्र-शस्त्र नाना प्रकारके दिखायी देते थे॥ २१॥
रथस्यासन् दश गजा गजस्य दश वाजिनः।
नरा दश ह्यस्यासन् पादरक्षाः समन्ततः॥ २२॥
एक-एक रथके पीछे दस-दस हाथी, एक-एक हाथीके पीछे दस-दस घोड़े और एक-एक घोड़ेके पीछे दस-दस पैदल सैनिक सब ओर पादरक्षक नियुक्त किये गये थे॥ २२॥