भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1128, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1128

तत्पश्चात् आपके पुत्र दुर्मद (दुर्धर्ष) और दुष्कर्ण एक ही रथपर बैठकर भीमसेनको बाणोंसे घायल करने लगे ।। ३७ ।। ततः कर्णस्य मिषतो द्रौणेर्दुर्योधनस्य च । कृपस्य सोमदत्तस्य बाह्लीकस्य च पाण्डवः ।। ३८ ।। दुर्मदस्य च वीरस्य दुष्कर्णस्य च तं रथम् । पादप्रहारेण धरां प्रावेशयदरिंदमः ।। ३९ ।। तदनन्तर कर्ण, अश्वत्थामा, दुर्योधन, कृपाचार्य, सोमदत्त और बाह्लीकके देखते-देखते शत्रुदमन पाण्डुपुत्र भीमने वीर दुर्मद और दुष्कर्णके उस रथको लात मारकर धरतीमें धँसा दिया ।। ३८-३९ ।। ततः सुतौ ते बलिनौ शूरौ दुष्कर्णदुर्मदौ । मुष्टिनाऽऽहत्य संक्रुद्धो ममर्द्र च ननर्द च ।। ४० ।। फिर आपके बलवान् एवं शूरवीर पुत्र दुर्मद और दुष्कर्णको क्रोधमें भरे हुए भीमसेनने मुक्केसे मारकर मसल डाला और वे जोर-जोरसे गर्जना करने लगे ।। ४० ।। ततो हाहाकृते सैन्ये दृष्ट्वा भीमं नृपाऽब्रुवन् । रुद्रोऽयं भीमरूपेण धार्तराष्ट्रेषु युध्यति ।। ४१ ।। यह देखकर कौरव-सेनामें हाहाकार मच गया। भीमसेनको देखकर राजालोग कहने लगे 'ये साक्षात् भगवान् रुद्र ही भीमसेनका रूप धारण करके धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध कर रहे हैं' ।। ४१ ।। एवमुक्त्वा पलायन्ते सर्वे भारत पार्थिवाः । विसंज्ञा वाहयन् वाहान् न च द्वौ सह धावतः ।। ४२ ।। भारत! ऐसा कहकर सब राजा अचेत होकर अपने वाहनोंको हाँकते हुए रणभूमिसे पलायन करने लगे। उस समय दो व्यक्ति एक साथ नहीं भागते थे ।। ततो बले भृशलुलिते निशामुखे सुपूजितो नृपवृषभैर्वृकोदरः । महाबलः कमलविवुद्धलोचनो युधिष्ठिरं नृपतिमपूजयद् बली ।। ४३ ।। तदनन्तर रात्रिके प्रथम प्रहरमें जब कौरव-सेना अत्यन्त भयभीत हो इधर-उधर भाग गयी, तब श्रेष्ठ राजाओंने विकसित कमलके समान सुन्दर नेत्रोंवाले महाबली भीमसेनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की और बलवान् भीमने राजा युधिष्ठिरका समादर किया ।। ४३ ।। ततो यमौ द्रुपदविराटकेकया युधिष्ठिरश्चापि परां मुदं ययुः । वृकोदरं भृशमनुपूजयंश्च ते यथान्धके प्रतिनिहते हरं सुराः ।। ४४ ।।

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