भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1202, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1202

उस युद्धमें क्रुद्ध हुए सात्यकिने सोमदत्तको गहरी चोट पहुँचायी और सोमदत्तने भी अपने बाणसमूहद्वारा सात्यकिको पीड़ित कर दिया ।। २३ ।। दशभिः सात्वतस्यार्थे भीमोऽहन् बाह्लिकात्मजम् । सोमदत्तोऽप्यसम्भ्रान्तो भीममार्च्छच्छितैः शरैः ।। २४ ।। उस समय भीमसेनने सात्यकिकी सहायताके लिये सोमदत्तको दस बाण मारे। इससे सोमदत्तको तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उन्होंने भी तीखे बाणोंसे भीमसेनको पीड़ित कर दिया ।। २४ ।। ततस्तु सात्वतस्यार्थे भीमसेनो नवं दृढ़म् । मुमोच परिघं घोरं सोमदत्तस्य वक्षसि ।। २५ ।। तत्पश्चात् सात्यकिकी ओरसे भीमसेनने सोमदत्तकी छातीको लक्ष्य करके एक नूतन सुदृढ़ एवं भयंकर परिघ छोड़ा ।। २५ ।। तमापतन्तं वेगेन परिघं घोरदर्शनम् । द्विधा चिच्छेद समरे प्रहसन्निव कौरवः ।। २६ ।। समरांगणमें बड़े वेगसे आते हुए उस भयंकर परिघके कुरुवंशी सोमदत्तने हँसते हुए-से दो टुकड़े कर डाले ।। २६ ।। स पपात द्विधा छिन्न आयसः परिघो महान् । महीधरस्येव महच्छिखरं वज्रदारितम् ।। २७ ।। लोहेका वह महान् परिघ दो खण्डोंमें विभक्त होकर वज्रसे विदीर्ण किये गये महान् पर्वतशिखरके समान पृथ्वीपर गिर पड़ा ।। २७ ।। ततस्तु सात्यकी राजन् सोमदत्तस्य संयुगे । धनुश्चिच्छेद भल्लेन हस्तावापं च पञ्चभिः ।। २८ ।। राजन्! तदनन्तर संग्रामभूमिमें सात्यकिने एक भल्लसे सोमदत्तका धनुष काट दिया और पाँच बाणोंसे उनके दस्ताने नष्ट कर दिये ।। २८ ।। ततश्चतुर्भिश्च शरैस्तूर्णं तांस्तुरगोत्तमान् । समीपं प्रेषयामास प्रेतराजस्य भारत ।। २९ ।। भारत! फिर तत्काल ही चार बाणोंसे उन्होंने सोमदत्तके उन उत्तम घोड़ोंको प्रेतराज यमके समीप भेज दिया ।। २९ ।। सारथेश्च शिरः कायाद् भल्लेन नतपर्वणा । जहार नरशार्दूलः प्रहसञ्छिनिपुङ्गवः ।। ३० ।। इसके बाद पुरुषसिंह शिनिप्रवर सात्यकिने हँसते हुए झुकी हुई गाँठवाले भल्लसे सोमदत्तके सारथिका सिर धड़से अलग कर दिया ।। ३० ।। ततः शरं महाघोरं ज्वलन्तमिव पावकम् । मुमोच सात्वतो राजन् स्वर्णपुङ्खं शिलाशितम् ।। ३१ ।।

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