महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1318, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ें‘महाराज! आपको तो मालूम ही होगा कि भीमसेनने हमारे राक्षस भाई-बन्धु हिडिम्ब, बक और किर्मीरका किस प्रकार वध कर डाला है ॥ ६१/२ ॥
परामर्शश्च कन्याया हिडिम्बायाः कृतः पुरा ॥ ७ ॥ किमन्यद् राक्षसानन्यानस्मांश्च परिभूय ह ।
‘इतना ही नहीं, उन्होंने मेरा तथा दूसरे राक्षसोंका अपमान करके पूर्वकालमें राक्षसकन्या हिडिम्बाके साथ भी बलात्कार किया था। इससे बढ़कर दूसरा अपराध क्या हो सकता है? ॥ ७१/२ ॥
तमहं सगणं राजन् सवाजिरथकुञ्जरम् ॥ ८ ॥ हैडिम्बिं च सहामात्यं हन्तुमभ्यागतः स्वयम् ।
‘अतः राजन्! मैं सैन्यसमूह, घोड़े, हाथी और रथोंसहित भीमसेनको तथा मन्त्रियोंसहित हिडिम्बापुत्र घटोत्कचको मार डालनेके लिये स्वयं यहाँ आया हूँ ॥ ८१/२ ॥
अद्य कुन्तीसुतान् सर्वान् वासुदेवपुरोगमान् ॥ ९ ॥ हत्वा सम्भक्षयिष्यामि सर्वैरनुचरैः सह ।
‘श्रीकृष्ण जिनके अगुआ हैं, उन सभी कुन्तीपुत्रोंको मारकर आज मैं समस्त अनुचरोंके साथ उन्हें खा जाऊँगा ॥ ९१/२ ॥
निवारय बलं सर्वं वयं योत्स्याम पाण्डवान् ॥ १० ॥ तस्यैतद् वचनं श्रुत्वा हृष्टो दुर्योधनस्तदा । प्रतिगृह्याब्रवीद् वाक्यं भ्रातृभिः परिवारितः ॥ ११ ॥
‘अतः आप अपनी सारी सेनाको रोक दीजिये। पाण्डवोंके साथ हमलोग युद्ध करेंगे।’ उसकी यह बात सुनकर भाइयोंसे घिरे हुए राजा दुर्योधनको बड़ी प्रसन्नता हुई। उसने अलायुधका प्रस्ताव स्वीकार करते हुए कहा— ॥ १०-११ ॥
त्वां पुरस्कृत्य सगणं वयं योत्स्यामहे परान् । न हि वैरान्तमनसः स्थास्यन्ति मम सैनिकाः ॥ १२ ॥
‘राक्षसराज! सैनिकोंसहित तुम्हें आगे रखकर हमलोग भी शत्रुओंके साथ युद्ध करेंगे; क्योंकि जिनका मन वैरका अन्त करनेमें लगा हुआ है, वे मेरे सैनिक चुपचाप खड़े नहीं रहेंगे’ ॥ १२ ॥
एवमस्त्विति राजानमुक्त्वा राक्षसपुङ्गवः । अभ्ययात् त्वरितो भैमिं सहितः पुरुषादकैः ॥ १३ ॥
‘अच्छा, ऐसा ही हो।’ राजा दुर्योधनसे इस प्रकार कहकर राक्षसराज अलायुध तुरंत ही राक्षसोंके साथ भीमसेनपुत्र घटोत्कचके सामने गया ॥ १३ ॥
दीप्यमानेन वपुषा रथेनादित्यवर्चसा । तादृशेनैव राजेन्द्र यादृशेन घटोत्कचः ॥ १४ ॥