भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1349

हृष्टश्चापि प्राविशत् तत् स्वसैन्यम् ॥ ६४ ॥

तत्पश्चात् जैसे वृत्रासुरका वध होनेपर देवताओंने इन्द्रका सत्कार किया था, उसी प्रकार कौरवोंसे पूजित होते हुए कर्णने आपके पुत्रके रथपर आरूढ़ हो बड़े हर्षके साथ अपनी उस सेनामें प्रवेश किया ॥ ६४ ॥

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे घटोत्कचवधे
एकोनाशीत्यधिकशततमोऽध्यायः ॥ १७९ ॥

इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके समय घटोत्कचका वधविषयक एक सौ उन्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १७९ ॥


* खंभेके समान आकृतिवाले।