भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1374

हैडिम्बिः प्राप्तवान् मृत्युं सूतपुत्रेण सङ्गतः ॥ ३९ ॥ 'जनार्दन! हमारे और आपके जीते-जी हिडिम्बा-कुमार घटोत्कच सूतपुत्रके साथ संग्राम करके मृत्युको कैसे प्राप्त हुआ? ॥ ३९ ॥

कदर्थीकृत्य नः सर्वान् पश्यतः सव्यसाचिनः । निहतो राक्षसः कृष्ण भैमसेनिर्महाबलः ॥ ४० ॥ 'श्रीकृष्ण! हम सबकी अवहेलना करके सव्यसाची अर्जुनके देखते-देखते भीमसेनकुमार महाबली राक्षस घटोत्कच मारा गया है ॥ ४० ॥

यदाभिमन्युर्निहतो धार्तराष्ट्रैर्दुरात्मभिः । नासीत् तत्र रणे कृष्ण सव्यसाची महारथः ॥ ४१ ॥ 'श्रीकृष्ण! धृतराष्ट्रके दुरात्मा पुत्रोंने जब युद्धमें अभिमन्युको मारा था, उस समय महारथी अर्जुन वहाँ उपस्थित नहीं थे ॥ ४१ ॥

निरुद्धाश्च वयं सर्वे सैन्धवेन दुरात्मना । निमित्तमभवद् द्रोणः सपुत्रस्तत्र कर्मणि ॥ ४२ ॥ 'दुरात्मा जयद्रथने हम सब लोगोंको भी व्यूहके बाहर ही रोक लिया था। वहाँ अभिमन्युके वधमें पुत्रसहित द्रोणाचार्य ही कारण हुए थे ॥ ४२ ॥

उपदिष्टो वधोपायः कर्णस्य गुरुणा स्वयम् । व्यायच्छतश्च खड्गेन द्विधा खड्गं चकार ह ॥ ४३ ॥ 'गुरु द्रोणाचार्यने स्वयं ही कर्णको अभिमन्युके वधका उपाय बताया था और जब वह तलवार लेकर परिश्रमपूर्वक युद्ध कर रहा था, उस समय उन्होंने ही उसकी तलवारके दो टुकड़े कर दिये थे ॥ ४३ ॥

व्यसने वर्तमानस्य कृतवर्मा नृशंसवत् । अश्वान् जघान सहसा तथोभौ पार्ष्णिसारथी ॥ ४४ ॥ 'इस प्रकार जब वह संकटमें पड़ गया, तब कृतवर्माने क्रूर मनुष्यकी भाँति सहसा उसके घोड़ों तथा दोनों पार्श्वरक्षकोंको मार डाला ॥ ४४ ॥

तथेतरे महेष्वासाः सौभद्रं युध्यपातयन् । अल्पे च कारणे कृष्ण हतो गाण्डीवधन्वना ॥ ४५ ॥ सैन्धवो यादवश्रेष्ठ तच्च नातिप्रियं मम । 'इसी प्रकार दूसरे महाधनुर्धरोंने सुभद्राकुमारको युद्धमें मार गिराया था। यादवश्रेष्ठ श्रीकृष्ण! अभिमन्युके वधमें जयद्रथका बहुत कम अपराध था, तो भी उस छोटे-से कारणको लेकर ही गाण्डीवधारी अर्जुनने जयद्रथको मार डाला है। यह कार्य मुझे अधिक प्रिय नहीं लगा है ॥ ४५ ½ ॥

यदि शत्रुवधो न्याय्यो भवेत् कर्तुं हि पाण्डवैः ॥ ४६ ॥ कर्णद्रोणौ रणे पूर्वं हन्तव्याविति मे मतिः ।