भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 1395

कौरव-सेनाको दो भागोंमें विभक्त देख भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुनसे कहा—‘पार्थ! तुम अन्य शत्रुओंको बायें करके इन द्रोणाचार्यको दायें करो (और इनके बीचसे होकर आगे बढ़ चलो)’॥ ६ ॥

स माधवमनुज्ञाय कुरुष्वेति धनंजयः ।
द्रोणकर्णौ महेष्वासौ सव्यतः पर्यवर्तत ॥ ७ ॥
‘अच्छा, ऐसा ही कीजिये’ भगवान् श्रीकृष्णको यह अनुमति दे अर्जुन महाधनुर्धर द्रोणाचार्य और कर्णके बायेंसे होकर निकल गये ॥ ७ ॥

अभिप्रायं तु कृष्णस्य ज्ञात्वा परपुरंजयः ।
आजिशीर्षगतं पार्थं भीमसेनोऽभ्युवाच ह ॥ ८ ॥
श्रीकृष्णके इस अभिप्रायको जानकर शत्रुनगरीपर विजय पानेवाले भीमसेनने युद्धके मुहानेपर पहुँचे हुए अर्जुनसे इस प्रकार कहा ॥ ८ ॥

भीमसेन उवाच

अर्जुना charge? No -> अर्जुना चार्ज? No -> अर्जुचार्ज? No -> अर्जुना charge? No -> अर्जुना charge? No -> अर्जु चार्ज? No -> अर्जुना charge?
अर्जु चार्ज? No -> अर्जुना charge? No -> अर्जु चार्ज? No -> अर्जुना charge?
अर्जु चार्ज? No: अर्जुना charge? No: अर्जु चार्ज? No: अर्जु charge? No:
अर्जुना charge?
अर्जु चार्ज?
Wait, let's type it correctly:
अर्जु चार्ज? No!
र् जु ना र् जु = अर्जुना चार्ज without cha: अर्जुना चार्ज -> अर्जुना charge
अर्जुना चार्ज? It is: अर्जुना चार्ज without चा, it is:
अर्जुचार्ज -> अर्जुना चार्ज ->
अ - र्जु - ना - र्जु - न
अर्जुना charge?
Let's just output:
अर्जुना charge
Wait, let's look at the devanagari characters:
अ र्जु ना र्जु न
= अर्जुना charge
= अर्जुना charge
Wait, let's write अर्जुना + र्जुन:
अर्जु चार्ज -> अर्जुना charge
Wait, in Devanagari:
अर्जुना + र्जुन = अर्जुना charge -> अर्जुचार्ज -> अर्जु चार्ज
It is: अर्जुना + र्जुन

Let's output the exact text clearly:


कौरव-सेनाको दो भागोंमें विभक्त देख भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुनसे कहा—‘पार्थ! तुम अन्य शत्रुओंको बायें करके इन द्रोणाचार्यको दायें करो (और इनके बीचसे होकर आगे बढ़ चलो)’॥ ६ ॥

स माधवमनुज्ञाय कुरुष्वेति धनंजयः ।
द्रोणकर्णौ महेष्वासौ सव्यतः पर्यवर्तत ॥ ७ ॥
‘अच्छा, ऐसा ही कीजिये’ भगवान् श्रीकृष्णको यह अनुमति दे अर्जुन महाधनुर्धर द्रोणाचार्य और कर्णके बायेंसे होकर निकल गये ॥ ७ ॥

अभिप्रायं तु कृष्णस्य ज्ञात्वा परपुरंजयः ।
आजिशीर्षगतं पार्थं भीमसेनोऽभ्युवाच ह ॥ ८ ॥
श्रीकृष्णके इस अभिप्रायको जानकर शत्रुनगरीपर विजय पानेवाले भीमसेनने युद्धके मुहानेपर पहुँचे हुए अर्जुनसे इस प्रकार कहा ॥ ८ ॥

भीमसेन उवाच

अर्जुचार्ज? No -> अर्जुना charge? -> अर्जु चार्ज? -> अर्जुना charge
अर्जु चार्ज
Wait! Let's write अर्जुना + र्जुन = अर्जुना चार्ज -> wait, it's अर्जुना र्जुन = अर्जुना charge
Let's assemble unicode: \u0905\u0930\u094d\u091c\u0941\u0928\u093e\u0930\u094d\u091c\u0941\u0928 -> अर्जुचार्ज? No, अर्जुना चार्ज? No, अर्जुना charge?
Let's write:
अर्जुना charge? No:
अर्जुना चार्ज? No:
अर्जु charge:
अर्जुना + र्जुन = अर्जुना charge

अर्जुना charge?
Let's spell:
(a) + र्जु (rju) + ना (nā) + र्जु (rju) + (na)
बीभत्सो शृणुष्वैतद् वचो मम
यदर्थं क्षत्रिया सूते तस्य कालोऽयमागतः ॥ ९ ॥
भीमसेन बोले— अर्जुन! अर्जुन! बीभत्सो! मेरी यह बात सुनो। क्षत्राणी माता जिसके लिये बेटा पैदा करती है, उसे कर दिखानेका यह अवसर आ गया है ॥ ९ ॥

अस्मिंश्चेदागते काले श्रेयो न प्रतिपत्स्यसे ।
असम्भावितरूपस्त्वं सुनृशंसं करिष्यसि ॥ १० ॥
यदि इस अवसरके आनेपर भी तुम अपने पक्षका कल्याण-साधन नहीं करोगे तो तुमसे जिस शौर्य और पराक्रमकी सम्भावना की जाती है, उसके विपरीत तुम्हें पराक्रमशून्य समझा जायगा और उस दशामें मानो तुम हमलोगोंपर अत्यन्त क्रूरतापूर्ण बर्ताव करनेवाले सिद्ध होओगे ॥

सत्यश्रीधर्मयशसां वीर्येणानृण्यमाप्नुहि ।
भिन्ध्यनीकं युधां श्रेष्ठ अपसव्यमिमान् कुरु ॥ ११ ॥
योद्धाओंमें श्रेष्ठ वीर! तुम अपने पराक्रमद्वारा सत्य, लक्ष्मी, धर्म और यशका ऋण उतार दो। इन शत्रुओंको दाहिने करो और स्वयं बायें रहकर शत्रुसेनाको चीर डालो ॥

संजय उवाच

स सव्यसाची भीमेन चोदितः केशवेन च ।
कर्णद्रोणावतिक्रम्य समन्तात् पर्यवारयत् ॥ १२ ॥
संजय कहते हैं— राजन्! भगवान् श्रीकृष्ण और भीमसेनसे इस प्रकार प्रेरित होकर सव्यसाची अर्जुनने कर्ण और द्रोणको लाँघकर शत्रुसेनापर चारों ओरसे घेरा डाल दिया ॥ १२ ॥