महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1604, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंअभिमन्योर्वधं श्रुत्वा प्रतिज्ञामपि चात्मनः । धनंजयेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ॥ २४ ॥ जो समरभूमिमें कर्णके समान ही पराक्रमी था, शीघ्रतापूर्वक अस्त्र चलानेवाला, सुदृढ़ बल-विक्रमसे सम्पन्न और महान् तेजस्वी था, वह कर्णपुत्र वृषसेन अभिमन्युका वध सुनकर की हुई अपनी प्रतिज्ञाको याद रखनेवाले अर्जुनके साथ भिड़कर कर्णके देखते-देखते उनके द्वारा यमलोक पहुँचा दिया गया ॥ २३-२४ ॥
नित्यं प्रसक्तवैरो यः पाण्डवैः पृथिवीपतिः । विश्राव्य वैरं पार्थेन श्रुतायुः स निपातितः ॥ २५ ॥ जो पाण्डवोंके साथ सदा वैर बाँधे रखता था, उस राजा श्रुतायुको कुन्तीकुमार अर्जुनने उसकी शत्रुताका स्मरण कराकर मार डाला ॥ २५ ॥
शल्यपुत्रस्तु विक्रान्तः सहदेवेन मारिष । हतो रुक्मरथो राजन् भ्राता मातुलजो युधि ॥ २६ ॥ माननीय नरेश! शल्यका पराक्रमी पुत्र रुक्मरथ, जो सहदेवका ममेरा भाई था, युद्धमें सहदेवके ही हाथसे मारा गया ॥ २६ ॥
राजा भगीरथो वृद्धो बृहत्क्षत्रश्च केकयः । पराक्रमन्तौ विक्रान्तौ निहतौ वीर्यवत्तरौ ॥ २७ ॥ बूढ़े राजा भगीरथ और केकयनरेश बृहत्क्षत्र—ये दोनों अत्यन्त बलवान् और पराक्रमी वीर थे, जो युद्धमें पराक्रम दिखाते हुए मारे गये ॥ २७ ॥
भगदत्तसुतो राजन् कृतप्रज्ञो महाबलः । श्येनवच्चरता संख्ये नकुलेन निपातितः ॥ २८ ॥ राजन्! भगदत्तके विद्वान् और महाबली पुत्रको युद्धमें बाजकी तरह झपटनेवाले नकुलने मार गिराया ॥
पितामहस्तव तथा बाह्लीकः सह बाह्लीकैः । निहतो भीमसेनेन महाबलपराक्रमः ॥ २९ ॥ आपके पितामह बाह्लीक भी महान् बल-पराक्रमसे सम्पन्न थे। वे भीमसेनके हाथसे बाह्लीक योद्धाओंसहित मारे गये ॥ २९ ॥
जयत्सेनस्तथा राजञ्जारासंधिर्महाबलः । मागधो निहतः संख्ये सौभद्रेण महात्मना ॥ ३० ॥ राजन्! जरासंधके महाबलवान् पुत्र मगधवासी जयत्सेनको महामना सुभद्राकुमारने युद्धमें मार डाला ॥
पुत्रस्ते दुर्मुखो राजन् दुःसहश्च महारथः । गदया भीमसेनेन निहतौ शूरमानिनौ ॥ ३१ ॥