भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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त्रयोदशोऽध्यायः

दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध

संजय उवाच

ततः कर्णो महेष्वासः पाण्डवानामनीकिनीम् ।
जघान समरे शूरः शरैः संनतपर्वभिः ॥ १ ॥
संजय कहते हैं— राजन्! तत्पश्चात् महाधनुर्धर शूरवीर कर्णने झुकी हुई गाँठवाले बाणोंद्वारा समरांगणमें पाण्डव-सेनाका संहार आरम्भ किया ॥ १ ॥

तथैव पाण्डवा राजंस्तव पुत्रस्य वाहिनीम् ।
कर्णस्य प्रमुखे क्रुद्धा निजघ्नुस्ते महारथाः ॥ २ ॥
राजन्! इसी प्रकार क्रोधमें भरे हुए महारथी पाण्डव भी कर्णके सामने ही आपके बेटेकी सेनाका विनाश करने लगे ॥ २ ॥

कर्णोऽपि राजन् समरे व्यहनत् पाण्डवीं चमूम् ।
नाराचैरर्करश्म्याभैः कर्मारपरिमार्जितैः ॥ ३ ॥
महाराज! कर्णके नाराच कारीगरोंद्वारा धोकर साफ किये गये थे, इसलिये सूर्यकी किरणोंके समान चमक रहे थे। उनके द्वारा वह भी रणभूमिमें पाण्डव-सेनाका वध करने लगा ॥ ३ ॥

तत्र भारत कर्णेन नाराचैस्ताडिता गजाः ।
नेदुः सेदुश्च मम्लुश्च बभ्रमुश्च दिशो दश ॥ ४ ॥
भरतनन्दन! वहाँ कर्णके चलाये हुए नाराचोंकी मार खाकर झुंड-के-झुंड हाथी चिग्घाड़ने, पीड़ासे कराहने, मलिन होने और दसों दिशाओंमें चक्कर काटने लगे ॥ ४ ॥

वध्यमाने बले तस्मिन् सूतपुत्रेण मारिष ।
नकुलोऽभ्यद्रवत् तूर्णं सूतपुत्रं महारणे ॥ ५ ॥
माननीय नरेश! सूतपुत्रके द्वारा उस महासमरमें जब अपनी सेना मारी जाने लगी, तब नकुलने तुरंत ही कर्णपर धावा किया ॥ ५ ॥

भीमसेनस्तथा द्रौणिं कुर्वाणं कर्म दुष्करम् ।
विन्दानुविन्दौ कैकेयौ सात्यकिः समवारयत् ॥ ६ ॥
भीमसेनने दुष्कर कर्म करते हुए अश्वत्थामाको तथा सात्यकिने केकयदेशीय विन्द और अनुविन्दको रोका ॥ ६ ॥

श्रुतकर्माणमायान्तं चित्रसेनो महीपतिः ।