भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1849, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1849

अकृतं द्रोणभीष्माभ्यां दुष्करं कर्म संयुगे ॥ १७ ॥ कुरुष्वाधिरथे वीर मिषतां सर्वधन्विनाम् । युद्धके लिये रथपर बैठे हुए अमिततेजस्वी महाबाहु राधापुत्र कर्णसे दुर्योधनने इस प्रकार कहा—'वीर! अधिरथकुमार! युद्धस्थलमें द्रोणाचार्य और भीष्म भी जिसे न कर सके, वही दुष्कर कर्म तुम सम्पूर्ण धनुर्धरोंके देखते-देखते कर डालो ॥ १६-१७ १/२ ॥ मनोगतं मम ह्यासीद् भीष्मद्रोणौ महारथौ ॥ १८ ॥ अर्जुनं भीमसेनं च निहन्ताराविति ध्रुवम् । 'मेरे मनमें यह विश्वास था कि 'महारथी भीष्म और द्रोणाचार्य अर्जुन और भीमसेनको अवश्य ही मार डालेंगे ॥ १८ १/२ ॥ ताभ्यां यदकृतं वीर वीरकर्म महामृधे ॥ १९ ॥ तत् कर्म कुरु राधेय वज्रपाणिरिवापरः । 'वीर राधापुत्र! वे दोनों जिसे न कर सके, वही वीरोचित कर्म आज महासमरमें दूसरे वज्रधारी इन्द्रके समान तुम निश्चय ही पूर्ण करो ॥ १९ १/२ ॥ गृहाण धर्मराजं वा जहि वा त्वं धनंजयम् ॥ २० ॥ भीमसेनं च राधेय माद्रीपुत्रौ यमावपि । 'राधानन्दन! या तो तुम धर्मराज युधिष्ठिरको कैद कर लो या अर्जुन, भीमसेन तथा माद्रीकुमार नकुल-सहदेवको मार डालो ॥ २० १/२ ॥ जयश्च तेऽस्तु भद्रं ते प्रयाहि पुरुषर्षभ ॥ २१ ॥ पाण्डुपुत्रस्य सैन्यानि कुरु सर्वाणि भस्मसात् । 'पुरुषप्रवर! तुम्हारी जय हो। कल्याण हो। अब तुम जाओ और पाण्डुपुत्रकी सारी सेनाओंको भस्म करो' ॥ ततस्तूर्यसहस्राणि भेरीणामयुतानि च ॥ २२ ॥ वाद्यमानान्यराजन्त मेघशब्दो यथा दिवि । तदनन्तर सहस्रों तूर्य और कई सहस्र रणभेरियाँ बज उठीं, जो आकाशमें मेघोंकी गर्जनाके समान प्रतीत हो रही थीं ॥ २२ १/२ ॥ प्रतिगृह्य तु तद् वाक्यं रथस्थो रथसत्तमः ॥ २३ ॥ अभ्यभाषत राधेयः शल्यं युद्धविशारदम् । चोदयाश्वान् महाबाहो यावद्धन्मि धनंजयम् ॥ २४ ॥ भीमसेनं यमौ चोभौ राजानं च युधिष्ठिरम् । रथपर बैठे हुए रथियोंमें श्रेष्ठ राधापुत्र कर्णने दुर्योधनके उस आदेशको शिरोधार्य करके युद्धकुशल राजा शल्यसे कहा—'महाबाहो! मेरे घोड़ोंको बढ़ाइये, जिससे कि मैं अर्जुन, भीमसेन, दोनों भाई नकुल-सहदेव तथा राजा युधिष्ठिरका वध कर सकूँ ॥ २३-२४ १/२ ॥

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