भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 189

कौरवोंसे घिरे हुए द्रोणाचार्यने युद्धमें सात्यकि, चेकितान, धृष्टद्युम्न, शिखण्डी, वृद्धक्षेमके पुत्र, चित्रसेनकुमार, सेनाबिन्दु तथा सुवर्चा—इन सबको तथा अन्य बहुत-से विभिन्न देशोंके राजाओंको परास्त कर दिया ।। ६२-६३ ।।

तावकाश्च महाराज जयं लब्ध्वा महाहवे ।
पाण्डवेयान् रणे जघ्नुर्द्रवमाणान् समन्ततः ।। ६४ ।।
महाराज! आपके पुत्रोंने उस महासमरमें विजय प्राप्त करके सब ओर भागते हुए पाण्डव-योद्धाओंको मारना आरम्भ किया ।। ६४ ।।

ते दानवा इवेन्द्रेण वध्यमाना महात्मना ।
पञ्चालाः केकया मत्स्याः समकम्पन्त भारत ।। ६५ ।।
भरतनन्दन! इन्द्रके द्वारा मारे जानेवाले दानवोंकी भाँति महामना द्रोणकी मार खाकर पांचाल, केकय और मत्स्यदेशके सैनिक काँपने लगे ।। ६५ ।।

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि द्रोणयुद्धे एकविंशोऽध्यायः ।। २१ ।।

इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें द्रोणाचार्यका युद्धविषयक इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। २१ ।।