महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1948, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंफिर पुत्रके प्राण बचानेकी इच्छासे कर्णने क्रूर भीमसेनको मार डालनेकी अभिलाषा लेकर उनपर तिहत्तर बाणोंका प्रहार किया ।। ३३ ।।
सुषेणस्तु धनुर्गृह्य भारसाधनमुत्तमम् ।
नकुलं पञ्चभिर्बाणैर्बाह्वोरुरसि चार्पयत् ।। ३४ ।।
तब सुषेणने महान् भारको सह लेनेवाले श्रेष्ठ धनुषको हाथमें लेकर नकुलकी दोनों भुजाओं और छातीमें पाँच बाणोंका प्रहार किया ।। ३४ ।।
नकुलस्तं तु विंशत्या विद्ध्वा भारसहैर्दृढैः ।
ननाद बलवन्नादं कर्णस्य भयमादधत् ।। ३५ ।।
नकुलने भी भार सहन करनेमें समर्थ बीस सुदृढ़ बाणोंद्वारा सुषेणको घायल करके कर्णके मनमें भय उत्पन्न करते हुए बड़े जोरसे गर्जना की ।। ३५ ।।
तं सुषेणो महाराज विद्ध्वा दशभिराशुगैः ।
चिच्छेद च धनुः शीघ्रं क्षुरप्रेण महारथः ।। ३६ ।।
महाराज! महारथी सुषेणने दस बाणोंसे नकुलको चोट पहुँचाकर शीघ्र ही एक क्षुरप्रके द्वारा उनका धनुष काट दिया ।। ३६ ।।
अथान्यद् धनुरदाय नकुलः क्रोधमूर्च्छितः ।
सुषेणं नवभिर्बाणैर्वारयामास संयुगे ।। ३७ ।।
तब क्रोधसे अचेत-से होकर नकुलने दूसरा धनुष हाथमें लिया और सुषेणको नौ बाण मारकर उसे युद्धस्थलमें आगे बढ़नेसे रोक दिया ।। ३७ ।।
स तु बाणैर्दिशो राजन्नाच्छाद्य परवीरहा ।
आजघ्ने सारथिं चास्य सुषेणं च ततस्त्रिभिः ।। ३८ ।।
चिच्छेद चास्य सुदृढं धनुर्भल्लैस्त्रिभिस्त्रिधा ।
राजन्! शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले नकुलने अपने बाणोंसे सम्पूर्ण दिशाओंको आच्छादित करके फिर तीन बाणोंसे सुषेण और उसके सारथिको भी घायल कर दिया। साथ ही तीन भल्ल मारकर उसके सुदृढ़ धनुषके तीन टुकड़े कर डाले ।। ३८ १/२ ।।
अथान्यद् धनुरदाय सुषेणः क्रोधमूर्च्छितः ।। ३९ ।।
आविध्यन्नकुलं षष्ट्या सहदेवं च सप्तभिः ।
तब क्रोधसे मूर्च्छित हुए सुषेणने दूसरा धनुष लेकर नकुलको साठ और सहदेवको सात बाणोंसे घायल कर दिया ।। ३९ १/२ ।।
तद् युद्धं सुमहद् घोरमासीद् देवासुरोपमम् ।। ४० ।।
निघ्नतां सायकैस्तूर्णमन्योन्यस्य वधं प्रति ।
बाणोंद्वारा शीघ्रतापूर्वक एक-दूसरेके वधके लिये चोट करते हुए वीरोंका वह महान् युद्ध देवासुर-संग्रामके समान भयंकर जान पड़ता था ।। ४० १/२ ।।
(सात्यकिर्वृषसेनं तु विद्ध्वा सप्तभिरायसैः ।