महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 197, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंसमस्त राजाओंके मध्यभागमें महाधनुर्धर राजा द्रुपद निर्भय होकर द्रोणाचार्यका सामना करनेके लिये आये ।। १३ ।। तं विराटोऽन्वयाच्छीघ्रं सह सर्वैर्महारथैः । केकयाश्च शिखण्डी च धृष्टकेतुस्तथैव च ।। १४ ।। स्वैः स्वैः सैन्यैः परिवृता मत्स्यराजानमन्वयुः । द्रुपदके पीछे सम्पूर्ण महारथियोंके साथ राजा विराट शीघ्रतापूर्वक चल रहे थे। केकयराजकुमार, शिखण्डी तथा धृष्टकेतु—ये अपनी-अपनी सेनाओंसे घिरकर मत्स्यराज विराटके पीछे चल रहे थे ।। १४ १/२ ।। तं तु पाटलिपुष्पाणां समवर्णा हयोत्तमाः ।। १५ ।। वहमाना व्यराजन्त मत्स्यस्यामित्रघातिनः । शत्रुसूदन मत्स्यराज विराटके रथको जो वहन करते हुए शोभा पा रहे थे, वे उत्तम घोड़े पाडरके फूलोंके समान लाल और सफेद रंगवाले थे ।। १५ १/२ ।। हरिद्रासमवर्णास्तु जवना हेममालिनः ।। १६ ।। पुत्रं विराटराजस्य सत्वरं समुदावहन् । हल्दीके समान पीले रंगवाले तथा सुवर्णमय माला धारण करनेवाले वेगशाली घोड़े विराटराजके पुत्रको शीघ्रतापूर्वक रणभूमिकी ओर ले जा रहे थे ।। १६ १/२ ।। इन्द्रगोपकवर्णैश्च भ्रातरः पञ्च केकयाः ।। १७ ।। जातरूपसमाभासाः सर्वे लोहितकध्वजाः । पाँच भाई केकयराजकुमार इन्द्रगोप (वीरबहूटी)-के समान रंगवाले घोड़ोंद्वारा रणभूमिमें लौट रहे थे। उन पाँचों भाइयोंकी कान्ति सुवर्णके समान थी तथा वे सब-के-सब लाल रंगकी ध्वजा-पताका धारण किये हुए थे ।। १७ १/२ ।। ते हेममालिनः शूराः सर्वे युद्धविशारदाः ।। १८ ।। वर्षन्त इव जीमूताः प्रत्यदृश्यन्त दंशिताः । सुवर्णकी मालाओंसे विभूषित वे सभी युद्धविशारद शूरवीर मेघोंके समान बाण-वर्षा करते हुए कवच आदिसे सुसज्जित दिखायी देते थे ।। १८ १/२ ।। आमपात्रनिकाशास्तु पांचाल्यममितौजसम् ।। १९ ।। दत्तास्तुम्बुरुणा दिव्याः शिखण्डिनमुदावहन् । अमित तेजस्वी पांचालराजकुमार शिखण्डीको तुम्बुरुके दिये हुए मिट्टीके कच्चे बर्तनके समान रंगवाले दिव्य अश्व वहन करते थे ।। १९ १/२ ।। तथा द्वादश साहस्त्राः पञ्चालानां महारथाः ।। २० ।।