महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1978, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंएकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके छः पुत्रोंका वध, भीम और कर्णका युद्ध, भीमके द्वारा गजसेना, रथसेना और घुड़सवारोंका संहार तथा उभयपक्षकी सेनाओंका घोर युद्ध
धृतराष्ट्र उवाच
सुदुष्करमिदं कर्म कृतं भीमेन संजय ।
येन कर्णो महाबाहू रथोपस्थे निपातितः ॥ १ ॥
धृतराष्ट्र बोले— संजय! भीमसेनने तो यह अत्यन्त दुष्कर कर्म कर डाला कि महाबाहु कर्णको रथकी बैठकमें गिरा दिया ॥ १ ॥
कर्णो ह्येको रणे हन्ता पाण्डवान् सृञ्जयैः सह ।
इति दुर्योधनः सूत प्राब्रवीन्मां मुहुर्मुहुः ॥ २ ॥
सूत! दुर्योधन मुझसे बारंबार कहा करता था कि 'कर्ण अकेला ही रणभूमिमें सृजयोंसहित समस्त पाण्डवोंका वध कर सकता है' ॥ २ ॥
पराजितं तु राधेयं दृष्ट्वा भीमेन संयुगे ।
ततः परं किमकरोत् पुत्रो दुर्योधनो मम ॥ ३ ॥
परंतु उस दिन युद्धस्थलमें राधापुत्र कर्णको भीमसेनके द्वारा पराजित हुआ देखकर मेरे पुत्र दुर्योधनने क्या किया? ॥ ३ ॥
संजय उवाच
विमुखं प्रेक्ष्य राधेयं सूतपुत्रं महाहवे ।
पुत्रस्तव महाराज सोदर्यान् समभाषत ॥ ४ ॥
संजयने कहा— महाराज! सूतपुत्र राधाकुमार कर्णको महासमरमें पराङ्मुख हुआ देख आपका पुत्र अपने भाइयोंसे बोला— ॥ ४ ॥
शीघ्रं गच्छत भद्रं वो राधेयं परिरक्षत ।
भीमसेनभयागाधे मज्जन्तं व्यसनार्णवे ॥ ५ ॥
'तुम्हारा कल्याण हो। तुमलोग शीघ्र जाओ और राधापुत्र कर्णकी रक्षा करो। वह भीमसेनके भयसे भरे हुए संकटके अगाध महासागरमें डूब रहा है' ॥ ५ ॥
ते तु राज्ञा समादिष्टा भीमसेनं जिघांसवः ।
अभ्यवर्तन्त संक्रुद्धाः पतङ्गाः पावकं यथा ॥ ६ ॥
राजा दुर्योधनकी आज्ञा पाकर आपके पुत्र अत्यन्त कुपित हो भीमसेनको मार डालनेकी इच्छासे उनके सामने गये, मानो पतंग आगके समीप जा पहुँचे हों ॥