महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 199, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंराजन्! मनके समान वेगशाली तथा काली गर्दनवाले श्वेतवर्णके घोड़े, जो सारथिकी आज्ञा माननेवाले थे, राजकुमार प्रतिविन्ध्यको रणमें ले गये ॥ २७ ॥ सुतसोमं तु यः सौम्यं पार्थः पुत्रमजीजनत् । माषपुष्पसवर्णास्तमवहन् वाजिनो रणे ॥ २८ ॥ कुन्तीकुमार भीमसेनने जिस सौम्यरूपवाले पुत्र सुतसोमको जन्म दिया था, उसे उड़दके फूलकी भाँति सफेद और पीले रंगवाले घोड़ोंने रणक्षेत्रमें पहुँचाया ॥ सहस्रसोमप्रतिमो बभूव पुरे कुरूणामुदयेन्दुनाम्नि । तस्मिंजात: सोमसंक्रन्दमध्ये यस्मात् तस्मात् सुतसोमोऽभवत् सः ॥ २९ ॥ कौरवोंके उदयेन्दु नामक पुर (इन्द्रप्रस्थ) में सोमाभिषव (सोमरस निकालने) के दिन सहस्रों चन्द्रमाओंके समान कान्तिमान् वह बालक उत्पन्न हुआ था, इसलिये उसका नाम सुतसोम रखा गया था ॥ २९ ॥ नाकुलिं तु शतानीकं शालपुष्पनिभा हयाः । आदित्यतरुणप्रख्याः श्लाघनीयमुदावहन् ॥ ३० ॥ नकुलके स्पृहणीय पुत्र शतानीकको शालपुष्पके समान रक्त-पीतवर्णवाले और बालसूर्यके समान कान्तिमान् अश्व रणभूमिमें ले गये ॥ ३० ॥ काञ्चनापिहितैर्युक्तैर्मयूरग्रीवसंनिभाः । द्रौपदेयं नरव्याघ्रं श्रुतकर्माणमाहवे ॥ ३१ ॥ मोरकी गर्दनके समान नीले रंगवाले घोड़ोंने सुनहरी रस्सियोंसे आबद्ध हो द्रौपदीपुत्र सहदेवकुमार पुरुषसिंह श्रुतकर्माको युद्धभूमिमें पहुँचाया ॥ ३१ ॥ श्रुतकीर्तिं श्रुतनिधिं द्रौपदेयं हयोत्तमाः । ऊहुः पार्थसमं युद्धे चाषपत्रनिभा हयाः ॥ ३२ ॥ इसी प्रकार युद्धमें अर्जुनकी समानता करनेवाले, शास्त्रज्ञानके भण्डार द्रौपदीनन्दन अर्जुनकुमार श्रुतकीर्तिको नीलकण्ठकी पाँखके समान रंगवाले उत्तम घोड़े रणक्षेत्रमें ले गये ॥ ३२ ॥ यमाहुरर्ध्यर्धगुणं कृष्णात् पार्थाच्च संयुगे । अभिमन्युं पिशङ्गास्तं कुमारमवहन् रणे ॥ ३३ ॥ जिसे युद्धमें श्रीकृष्ण और अर्जुनसे ड्योढ़ा बताया गया है, उस सुभद्राकुमार अभिमन्युको रणक्षेत्रमें कपिलवर्णवाले घोड़े ले गये ॥ ३३ ॥ एकस्तु धार्तराष्ट्रेभ्यः पाण्डवान् यः समाश्रितः । तं बृहन्तो महाकाया युयुत्सुमवहन् रणे ॥ ३४ ॥