महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2014, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंराजन! तब क्रोधमें भरकर विषधर सर्पके समान फुफकारते हुए अश्वत्थामाने सात्यकिको पचीस बाणोंसे घायल करके बदला चुकाया ।। १५ ।।
श्रुतकीर्तिं च नवभिः सुतसोमं च पञ्चभिः।
अष्टभिः श्रुतकर्माणं प्रतिविन्ध्यं त्रिभिः शरैः ।। १६ ।।
शतानीकं च नवभिर्धर्मपुत्रं च पञ्चभिः।
तथेतरांस्ततः शूरान् द्वाभ्यां द्वाभ्यामताडयत् ।। १७ ।।
श्रुतकीर्तेस्तथा चापं चिच्छेद निशितैः शरैः।
फिर श्रुतकीर्तिको नौ, सुतसोमको पाँच, श्रुतकर्म्माको आठ, प्रतिविन्ध्यको तीन, शतानीकको नौ, धर्मपुत्र युधिष्ठिरको पाँच तथा अन्य शूरवीरोंको दो-दो बाणोंसे पीट दिया। इसके सिवा उसने पैने बाणोंद्वारा श्रुतकीर्तिके धनुषको भी काट दिया ।। १६-१७ १/२ ।।
अथान्यद् धनुरदाय श्रुतिकीर्तिर्महारथः ।। १८ ।।
द्रौणायनिं त्रिभिर्विद्ध्वा विव्याधान्यैः शितैः शरैः।
तब महारथी श्रुतकीर्तिने दूसरा धनुष लेकर द्रोणकुमारको पहले तीन बाणोंसे घायल करके फिर दूसरे-दूसरे पैने बाणोंद्वारा बींध डाला ।। १८ १/२ ।।
ततो द्रौणिर्महाराज शरवर्षेण मारिष ।। १९ ।।
छादयामास तत् सैन्यं समन्ताद् भरतर्षभ।
मान्यवर भरतभूषण महाराज! तत्पश्चात् द्रोणकुमारने अपने बाणोंकी वर्षासे युधिष्ठिरकी उस सेनाको सब ओरसे ढक दिया ।। १९ १/२ ।।
ततः पुनरमेयात्मा धर्मराजस्य कार्मुकम् ।। २० ।।
द्रौणिश्चिच्छेद विहसन् विव्याध च शरैस्त्रिभिः।
उसके बाद अमेय आत्मबलसे सम्पन्न द्रोणकुमारने धर्मराजके धनुषको काट डाला और हँसते-हँसते तीन बाणोंद्वारा पुनः उन्हें घायल कर दिया ।। २० १/२ ।।
ततो धर्मसुतो राजन् प्रगृह्यान्यन्महद् धनुः ।। २१ ।।
द्रौणिं विव्याध सप्तत्या बाह्वोरुरसि चार्पयत् ।
राजन! तब धर्मपुत्र युधिष्ठिरने दूसरा विशाल धनुष हाथमें लेकर अश्वत्थामाको बींध दिया एवं उसकी दोनों भुजाओं और छातीमें सत्तर बाण मारे ।। २१ १/२ ।।
सात्यकिस्तु ततः क्रुद्धो द्रौणेः प्रहरतो रणे ।। २२ ।।
अर्धचन्द्रेण तीक्ष्णेन धनुश्छित्त्वानदद् भृशम् ।
इसके बाद कुपित हुए सात्यकिने रणभूमिमें प्रहार करनेवाले अश्वत्थामाके धनुषको तीखे अर्धचन्द्रसे काटकर बड़े जोरसे गर्जना की ।। २२ १/२ ।।
छिन्नधन्वा ततो द्रौणिः शक्त्या शक्तिमतां वरः ।। २३ ।।
सारथिं पातयामास शैनेयस्य रथाद् द्रुतम्।