महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2018, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंषट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः
नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना
संजय उवाच
भीमसेनं सपाञ्चाल्यं चेदिकेकयसंवृतम् ।
वैकर्तनः स्वयं रुद्ध्वा वारयामास सायकैः ॥ १ ॥
**संजय कहते हैं—**राजन्! पांचालों, चेदियों और केकयोंसे घिरे हुए भीमसेनको स्वयं वैकर्तन कर्णने बाणोंद्वारा अवरुद्ध करके उन्हें आगे बढ़नेसे रोक दिया ॥ १ ॥
ततस्तु चेदिकारूषान् सृञ्जयांश्च महारथान् ।
कर्णो जघान समरे भीमसेनस्य पश्यतः ॥ २ ॥
तदनन्तर समरांगणमें कर्णने भीमसेनके देखते-देखते चेदि, कारूष और सृंजय महारथियोंका संहार आरम्भ कर दिया ॥ २ ॥
भीमसेनस्ततः कर्णं विहाय रथसत्तमम् ।
प्रययौ कौरवं सैन्यं कक्षमग्निरिव ज्वलन् ॥ ३ ॥
तब भीमसेनने भी रथियोंमें श्रेष्ठ कर्णको छोड़कर जैसे आग घास-फूँसको जलाती है, उसी प्रकार कौरव-सेनाको दग्ध करनेके लिये उसपर आक्रमण किया ॥ ३ ॥
सूतपुत्रोऽपि समरे पञ्चालान् केकयांस्तथा ।
सृञ्जयांश्च महेष्वासान् निजघान सहस्रशः ॥ ४ ॥
सूतपुत्र कर्णने समरांगणमें सहस्रों पांचाल, केकय तथा सृंजय योद्धाओंको, जो महाधनुर्धर थे, मार डाला ॥ ४ ॥
संशप्तकेषु पार्थश्च कौरवेषु वृकोदरः ।
पञ्चालेषु तथा कर्णः क्षयं चक्रमहारथाः ॥ ५ ॥
अर्जुन संशप्तकोंकी, भीमसेन कौरवोंकी तथा कर्ण पांचालोंकी सेनामें घुसकर युद्ध करते थे! इन तीनों महारथियोंने बहुत-से शत्रुओंका संहार कर डाला ॥ ५ ॥
ते क्षत्रिया दह्यमानास्त्रिभिस्तैः पावकोपमैः ।