भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2192, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 2192

अद्य दुःखमहं मोक्ष्ये त्रयोदशसमार्जितम् ॥ ४७ ॥ हत्वा कर्णं रणे कृष्ण शम्बरं मघवानिव । ‘श्रीकृष्ण! जैसे इन्द्रने शम्बरासुरका वध किया था, उसी प्रकार मैं रणभूमिमें कर्णको मारकर आज तेरह वर्षोंसे संचित किये हुए दुःखका परित्याग कर दूँगा ॥ अद्य कर्णे हते युद्धे सोमकानां महारथाः ॥ ४८ ॥ कृतं कार्यं च मन्यन्तां मित्रकार्येिप्सवो युधि । ‘आज युद्धमें कर्णके मारे जानेपर मित्रके कार्यकी सिद्धि चाहनेवाले सोमकवंशी महारथी अपनेको कृतकार्य समझ लें ॥ न जाने च कथं प्रीतिः शैनेयस्याद्य माधव ॥ ४९ ॥ भविष्यति हते कर्णे मयि चापि जयाधिके । ‘माधव! आज कर्णके मारे जाने और विजयके कारण मेरी प्रतिष्ठा बढ़ जानेपर न जाने शिनिपौत्र सात्यकिको कितनी प्रसन्नता होगी? ॥ ४९ १/२ ॥ अहं हत्वा रणे कर्णं पुत्रं चास्य महारथम् ॥ ५० ॥ प्रीतिं दास्यामि भीमस्य यमयोः सात्यकस्य च । ‘मैं रणभूमिमें कर्ण और उसके महारथी पुत्रको मारकर भीमसेन, नकुल, सहदेव तथा सात्यकिको प्रसन्न करूँगा ॥ धृष्टद्युम्नशिखण्डिभ्यां पञ्चालानां च माधव ॥ ५१ ॥ अद्यानृण्यं गमिष्यामि हत्वा कर्णं महाहवे । ‘माधव! आज महासमरमें कर्णका वध करके मैं धृष्टद्युम्न, शिखण्डी तथा पांचालोंके ऋणसे छुटकारा पा जाऊँगा ॥ अद्य पश्यन्तु संग्रामे धनंजयममर्षणम् ॥ ५२ ॥ युध्यन्तं कौरवान् संख्ये घातयन्तं च सूतजम् । ‘आज समस्त सैनिक देखें कि संग्रामभूमिमें अमर्षशील धनंजय किस प्रकार कौरवोंसे युद्ध करता और सूतपुत्र कर्णको मारता है ॥ ५२ १/२ ॥ भवत्सकाशे वक्ष्ये च पुनरेवात्मसंस्तवम् ॥ ५३ ॥ धनुर्वेदे मत्समो नास्ति लोके पराक्रमे वा मम कोऽस्ति तुल्यः । को वाप्यन्यो मत्समोऽस्ति क्षमावां- स्तथा क्रोधे सदृशोऽन्यो न मेऽस्ति ॥ ५४ ॥ ‘मैं आपके निकट पुनः अपनी प्रशंसासे भरी हुई बात कहता हूँ, धनुर्वेदमें मेरी समानता करनेवाला इस संसारमें दूसरा कोई नहीं है। फिर पराक्रममें मेरे-जैसा कौन है? मेरे समान क्षमाशील भी दूसरा कौन है तथा क्रोधमें भी मेरे-जैसा दूसरा कोई नहीं है ॥ ५३-५४ ॥ अहं धनुष्मान् ससुरासुरांश्र्च

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