महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2293, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंस नागराजः सनियन्तृकोऽपतत् तथा हतो बभ्रुसुतेषुभिर्भृशम् । स चापि देवावृधसूनुरर्दितः पपात नुन्नः सहदेवसूनुना ॥ १८ ॥ अन्तमें बभ्रुपुत्रके बाणोंसे अत्यन्त आहत होकर वह गजराज भी संचालकसहित धरतीपर लोट गया। फिर वह देवावृधकुमार भी सहदेवके पुत्रसे पीड़ित हो धराशायी हो गया ॥ १८ ॥
विषाणगात्रावरयोधपातिना गजेन हन्तुं शकुनिं कुलिन्दजः । जगाम वेगेन भृशार्दयंश्च तं ततोऽस्य गान्धारपतिः शिरोऽहरत् ॥ १९ ॥ तत्पश्चात् दूसरे कुलिन्दराजकुमारने शकुनिको मार डालनेके लिये दाँत, शरीर और सूँड़के द्वारा बड़े-बड़े योद्धाओंको मार गिरानेवाले हाथीके द्वारा उसपर वेगपूर्वक आक्रमण किया और उसे अत्यन्त घायल कर दिया। तब गान्धारराज शकुनिने उसका सिर काट लिया ॥ १९ ॥
ततः शतानीकहता महागजा हया रथाः पत्तिगणाश्च तावकाः । सुपर्णवातप्रहता यथोरगा- स्तथागता गां विवशा विचूर्णिताः ॥ २० ॥ यह देख शतानीकने आपकी सेनापर आक्रमण किया। जैसे गरुड़के पंखोंकी हवासे आहत हुए सर्प पृथ्वीपर गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार शतानीकद्वारा मारे गये आपके विशाल हाथी, घोड़े, रथ और पैदल विवश हो पृथ्वीपर गिरकर चूर-चूर हो गये ॥ २० ॥
ततोऽभ्यविद्ध्यद् बहुभिः शितैः शरैः कलिङ्गपुत्रो नकुलात्मजं स्मयन् । ततोऽस्य कोपाद् विचकर्त नाकुलिः शिरः क्षुरेणाम्बुजसंनिभाननम् ॥ २१ ॥ तदनन्तर मुसकराते हुए कलिंगराजके पुत्रने अपने बहुसंख्यक पैने बाणोंद्वारा नकुलके पुत्र शतानीकको क्षत-विक्षत कर दिया। इससे नकुलकुमारको बड़ा क्रोध हुआ और उसने एक क्षुरके द्वारा कलिंगराजकुमारका कमलसदृश मुखवाला मस्तक काट डाला ॥ २१ ॥
ततः शतानीकमविध्यदायसै- स्त्रिभिः शरैः कर्णसुतोऽर्जुनं त्रिभिः । त्रिभिश्च भीमं नकुलं च सप्तभि- र्जनार्दनं द्वादशभिश्च सायकैः ॥ २२ ॥