भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2343, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2343

विर्वाजिसूतो विधनुर्विकेतुः ॥ ६४ ॥ हतो रथाग्रादपतत् स रुग्णः परश्वधैः शाल इवावकृत्तः । वह राजकुमार मस्तक, भुजा, घोड़े, सारथि, धनुष और ध्वजसे रहित हो मरकर रथके अग्रभागसे नीचे गिर पड़ा, मानो फरसोंसे काटा गया शालवृक्ष टूटकर धराशायी हो गया हो ॥ ६४ १/२ ॥

पुनश्च कर्णं त्रिभिरष्टभिश्च द्वाभ्यां चतुर्भिर्दशभिश्च विद्ध्वा ॥ ६५ ॥ चतुःशतान् द्विरदान् सायुधान् वै हत्वा रथानष्टशताञ्जघान । इसके बाद अर्जुनने पुनः तीन, आठ, दो, चार और दस बाणोंद्वारा कर्णको बारंबार घायल करके अस्त्र-शस्त्रधारी सवारोंसहित चार सौ हाथियोंको मारकर आठ सौ रथोंको नष्ट कर दिया ॥ ६५ १/२ ॥

सहस्रशोऽश्वांश्च पुनः स सादी- नष्टौ सहस्राणि च पत्तिवीरान् ॥ ६६ ॥ कर्णं ससूतं सरथं सकेतु- मदृश्यमज्जोगतिभिः प्रचक्रे । तदनन्तर सवारोंसहित हजारों घोड़ों और सहस्रों पैदल वीरोंको मारकर रथ, सारथि और ध्वजसहित कर्णको भी शीघ्रगामी बाणोंद्वारा ढककर अदृश्य कर दिया ॥

अथाक्रोशन् कुरवो वध्यमाना धनंजयेनाधिरथिं समन्तात् ॥ ६७ ॥ मुञ्चाभिविद्ध्यर्जुनमाशु कर्ण बाणैः पुरा हन्ति कुरून् समग्रान् । अर्जुनकी मार खाते हुए कौरव-सैनिक चारों ओरसे कर्णको पुकारने लगे—'कर्ण! शीघ्र बाण छोड़ो और अर्जुनको घायल कर डालो। कहीं ऐसा न हो कि ये पहले ही समस्त कौरवोंका वध कर डालें' ॥ ६७ १/२ ॥

स चोदितः सर्वयत्नेन कर्णो मुमोच बाणान् सुबहूनभीक्ष्णम् ॥ ६८ ॥ ते पाण्डुपञ्चालगणान् निजघ्नु- र्मर्मच्छिदः शोणितपांसुदिग्धाः । इस प्रकार प्रेरणा मिलनेपर कर्णने सारी शक्ति लगाकर बारंबार बहुत-से बाण छोड़े। रक्त और धूलमें सने हुए वे मर्मभेदी बाण पाण्डव और पांचालोंका विनाश करने लगे ॥

तावुत्तमौ सर्वधनुर्धराणां

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व · पृष्ठ 2343, कुल 3237 में से · BharatKosha