भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2429

इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि युधिष्ठिरहर्षे षण्णवतितमोऽध्यायः ॥ ९६ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरका हर्षविषयक छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९६ ॥


॥ कर्णपर्व सम्पूर्णम् ॥


अनुष्टुप्(बड़े श्लोक)बड़े श्लोकोंको अनुष्टुप् माननेपरकुल
उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये४०९२॥(१०७॥)१२४७।।।—५३४०।—
दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये१२५॥(२८)३८॥१६४
कर्णपर्व कीकुल श्लोक-संख्या५५०४।—

* 'सर्वलोकानुचर:' का यह अर्थ भी हो सकता है कि सब लोग उसके अनुचर हो जाते हैं।