भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2451

तब क्रोधमें भरे हुए भीमसेन और द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्नने अपनी चतुरंगिणी सेनाके द्वारा उन्हें तितर-बितर करके बाणोंद्वारा अत्यन्त घायल कर दिया॥ २१ १/२॥

प्रत्ययुध्यंस्तु ते सर्वे भीमसेनं सपार्षतम्॥ २२॥
पार्थपार्षतयोश्चान्ये जगृहुस्तत्र नामनी।
वे समस्त सैनिक भी भीमसेन और धृष्टद्युम्नका डटकर सामना करने लगे। दूसरे बहुत-से योद्धा वहाँ उन दोनोंके नाम ले-लेकर ललकारने लगे॥ २२ १/२॥

अक्रुध्यत रणे भीमस्तैर्मृधे प्रत्यवस्थितैः॥ २३॥
सोऽवतीर्य रथात्तूर्णं गदापाणिरयुध्यत।
युद्धस्थलमें सामने खड़े हुए उन योद्धाओंके साथ जूझते समय भीमसेनको बड़ा क्रोध हुआ। वे तुरंत ही रथसे उतरकर हाथमें गदा ले उन सबके साथ युद्ध करने लगे॥ २३ १/२॥

न तान् रथस्थो भूमिष्ठान् धर्मापेक्षी वृकोदरः॥ २४॥
योधयामास कौन्तेयो भुजवीर्यमुपाश्रितः।
युद्धधर्मके पालनकी इच्छा रखनेवाले कुन्तीकुमार भीमसेनने स्वयं रथपर बैठकर भूमिपर खड़े हुए पैदल सैनिकोंके साथ युद्ध करना उचित नहीं समझा। वे अपने बाहुबलका भरोसा करके उन सबके साथ पैदल ही जूझने लगे॥ २४ १/२॥

जातरूपपरिच्छन्नां प्रगृह्य महतीं गदाम्॥ २५॥
न्यवधीत् तावकान् सर्वान् दण्डपाणिरिवान्तकः।
उन्होंने दण्डपाणि यमराजके समान सुवर्णपत्रसे जटित विशाल गदा लेकर उसके द्वारा आपके समस्त सैनिकोंका संहार आरम्भ किया॥ २५ १/२॥

पदातयो हि संरब्धास्त्यक्तजीवितबान्धवाः॥ २६॥
भीममभ्यद्रवन् संख्ये पतङ्गा इव पावकम्।
उस समय अपने प्राणों और बन्धु-बान्धवोंका मोह छोड़कर रोष और आवेशमें भरे हुए पैदल सैनिक युद्धस्थलमें भीमसेनकी ओर उसी प्रकार दौड़े, जैसे पतंग जलती हुई आगपर टूट पड़ते हैं॥ २६ १/२॥

आसाद्य भीमसेनं ते संरब्धा युद्धदुर्मदाः॥ २७॥
विनेदुः सहसा दृष्ट्वा भूतग्रामा इवान्तकम्।
क्रोधमें भरे हुए वे रणदुर्मद योद्धा भीमसेनसे भिड़कर सहसा उसी प्रकार आर्तनाद करने लगे, जैसे प्राणियोंके समुदाय यमराजको देखकर चीख उठते हैं॥ २७ १/२॥

श्येनवद् व्यचरद् भीमः खड्गेन गदया तथा॥ २८॥
पञ्चविंशतिसाहस्रांस्तावकानां व्यपोथयत्।
उस समय भीमसेन रणभूमिमें बाजकी तरह विचर रहे थे। उन्होंने तलवार और गदाके द्वारा आपके उन पचीस हजार योद्धाओंको मार गिराया॥ २८ १/२॥

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