भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2627

तावद् युष्मास्वपापेषु प्रचरिष्यति पापकम् ॥ ४० ॥ ‘दुर्बुद्धि दुर्योधनके प्राण जबतक शरीरमें स्थित रहेंगे, तबतक तुम निष्पाप बन्धुओंपर भी वह पापपूर्ण बर्ताव ही करता रहेगा ॥ ४० ॥ न च युक्तोऽन्यथा जेतुमृते युद्धेन माधव । इत्यब्रवीत् सदा मां हि विदुरः सत्यदर्शनः ॥ ४१ ॥ ‘माधव! युद्धके सिवा और किसी उपायसे दुर्योधनको जीतना सम्भव नहीं है।’ यह बात सत्यदर्शी विदुरजी सदासे ही मुझे कहते आ रहे हैं ॥ ४१ ॥ तत् सर्वमद्य जानामि व्यवसायं दुरात्मनः । यदुक्तं वचनं तेन विदुरेण महात्मना ॥ ४२ ॥ ‘महात्मा विदुरने जो बात कही है, उसके अनुसार मैं उस दुरात्माके सम्पूर्ण निश्चयको आज जानता हूँ ॥ यो हि श्रुत्वा वचः पथ्यं जामदग्न्याद् यथातथम् । अवामन्यत दुर्बुद्धिर्ध्रुवं नाशमुखे स्थितः ॥ ४३ ॥ ‘जिस दुर्बुद्धिने जमदग्निनन्दन परशुरामजीके मुखसे यथार्थ एवं हितकारक वचन सुनकर भी उसकी अवहेलना कर दी, वह निश्चय ही विनाशके मुखमें स्थित है ॥ ४३ ॥ उक्तं हि बहुशः सिद्धैर्जातमात्रे सुयोधने । एनं प्राप्य दुरात्मानं क्षयं क्षत्रं गमिष्यति ॥ ४४ ॥ ‘दुर्योधनके जन्म लेते ही सिद्ध पुरुषोंने बारंबार कहा था कि ‘इस दुरात्माको पाकर क्षत्रियजातिका विनाश हो जायगा’ ॥ ४४ ॥ तदिदं वचनं तेषां निरुक्तं वै जनार्दन । क्षयं याता हि राजानो दुर्योधनकृते भृशम् ॥ ४५ ॥ ‘जनार्दन! उनकी वह बात यथार्थ हो गयी; क्योंकि दुर्योधनके कारण बहुत-से राजा नष्ट हो गये ॥ सोऽद्य सर्वान् रणे योधन् निहनिष्यामि माधव । क्षत्रियेषु हतेष्वाशु शून्ये च शिबिरे कृते ॥ ४६ ॥ वधाय चात्मनोऽस्माभिः संयुगं रोचयिष्यति । तदन्तं हि भवेद् वैरमनुमानेन माधव ॥ ४७ ॥ ‘माधव! आज मैं रणभूमिमें शत्रुपक्षके समस्त योद्धाओंको मार गिराऊँगा। इन क्षत्रियोंका शीघ्र ही संहार हो जानेपर जब सारा शिविर सूना हो जायगा, तब वह अपने वधके लिये हमलोगोंके साथ जूझना पसंद करेगा। माधव! मेरे अनुमानसे उसका वध होनेपर ही इस वैरका अन्त होगा ॥ ४७ ॥ एवं पश्यामि वार्ष्णेय चिन्तयन् प्रज्ञया स्वया । विदुरस्य च वाक्येन चेष्टया च दुरात्मनः ॥ ४८ ॥