भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 263, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 263

व्याकोशपद्माभमुखो नीलो विव्याध सायकैः ॥ २२ ॥ नीलका मुख विकसित कमलके समान कान्तिमान् था। उन्होंने पद्मसमूहकी-सी आकृति तथा कमल-दलके सदृश नेत्रोंवाले अश्वत्थामाको अपने बाणोंसे बींध डाला ॥ २२ ॥

तेनापि विद्धः सहसा दौणिर्भल्लैः शितैस्त्रिभिः । धनुर्ध्वजं च छत्रं च द्विषतः स न्यकृन्तत ॥ २३ ॥ उनके द्वारा घायल होकर अश्वत्थामाने सहसा तीन तीखे भल्लोंद्वारा अपने शत्रु नीलके धनुष, ध्वज तथा छत्रको काट डाला ॥ २३ ॥

स प्लुतः स्यन्दनात्तस्मान्नीलश्चर्मवरासिभृत् । द्रौणायनेः शिरः कायाद्धर्तुमैच्छत् पतत्रिवत् ॥ २४ ॥ तब नील ढाल और सुन्दर तलवार हाथमें लेकर उस रथसे कूद पड़े। जैसे पक्षी किसी मनचाही वस्तुको लेनेके लिये झपट्टा मारता है, उसी प्रकार नीलने भी अश्वत्थामाके धड़से उसका सिर उतार लेनेका विचार किया ॥ २४ ॥

तस्योन्नतांसं सुनसं शिरः कायात् सकुण्डलम् । भल्लेनापाहरद् द्रौणिः स्मयमान इवानघ ॥ २५ ॥ निष्पाप नरेश! उस समय अश्वत्थामाने मुसकराते हुए-से भल्ल मारकर उसके द्वारा नीलके ऊँचे कंधों, सुन्दर नासिकाओं तथा कुण्डलोंसहित मस्तकको धड़से काट गिराया ॥ २५ ॥

सम्पूर्णचन्द्राभमुखः पद्मपत्रनिभेक्षणः । प्रांशुरुत्पलपत्राभो निहतो न्यपतद् भुवि ॥ २६ ॥ पूर्णचन्द्रमाके समान कान्तिमान् मुख और कमलदलके समान सुन्दर नेत्रवाले राजा नील बड़े ऊँचे कदके थे। उनकी अंगकान्ति नीलकमल-दलके समान श्याम थी। वे अश्वत्थामाद्वारा मारे जाकर पृथ्वीपर गिर पड़े ॥ २६ ॥

ततः प्रविव्यथे सेना पाण्डवी भृशमाकुला । आचार्यपुत्रेण हते नीले ज्वलिततेजसि ॥ २७ ॥ आचार्यपुत्रके द्वारा प्रज्वलित तेजवाले राजा नीलके मारे जानेपर पाण्डव-सेना अत्यन्त व्याकुल और व्यथित हो उठी ॥ २७ ॥

अचिन्तयंश्च ते सर्वे पाण्डवानां महारथाः । कथं नो वासविस्त्रायाच्छत्रुभ्य इति मारिष ॥ २८ ॥ आर्य! उस समय समस्त पाण्डव महारथी यह सोचने लगे कि इन्द्रकुमार अर्जुन शत्रुओंके हाथसे हमारी रक्षा कैसे कर सकते हैं? ॥ २८ ॥

दक्षिणेन तु सेनायाः कुरुते कदनं बली । संशप्तकावशेषस्य नारायणबलस्य च ॥ २९ ॥

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