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महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2787, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 2787

नृपश्रेष्ठ! वहाँ आकर उन महाभाग मुनियोंने देखा कि उस तीर्थकी दारुण दशा हो गयी है, वहाँ सरस्वतीका जल रक्तसे ओतप्रोत है और बहुत-से राक्षस उसका पान कर रहे हैं।। ६-७ ।। तान् दृष्ट्वा राक्षसान् राजन् मुनयः संशितव्रताः । परित्राणे सरस्वत्याः परं यत्नं प्रचक्रिरे ।। ८ ।। राजन्! उन राक्षसोंको देखकर कठोर व्रतका पालन करनेवाले मुनियोंने सरस्वतीके उस तीर्थकी रक्षाके लिये महान् प्रयत्न किया ।। ८ ।। ते तु सर्वे महाभागाः समागम्य महाव्रताः । आहूय सरितां श्रेष्ठांमिदं वचनमब्रुवन् ।। ९ ।। उन सभी महान् व्रतधारी महाभाग ऋषियोंने मिलकर सरिताओंमें श्रेष्ठ सरस्वतीको बुलाकर पूछा— ।। ९ ।। कारणं ब्रूहि कल्याणि किमर्थं ते ह्रदो ह्ययम् । एवमाकुलतां यातः श्रुत्वा ध्यास्यामहे वयम् ।। १० ।। ‘कल्याणि! तुम्हारा यह कुण्ड इस प्रकार रक्तसे मिश्रित क्यों हो गया? इसका क्या कारण है? बताओ। उसे सुनकर हमलोग कोई उपाय सोचेंगे' ।। १० ।। ततः सा सर्वमाचष्ट यथावृत्तं प्रवेपती । दुःखितामथ तां दृष्ट्वा ऊचुस्ते वै तपोधनाः ।। ११ ।। तब काँपती हुई सरस्वतीने सारा वृत्तान्त यथार्थ रूपसे कह सुनाया। उसे दुःखी देख वे तपोधन महर्षि उससे बोले— ।। ११ ।। कारणं श्रुतमस्माभिः शापश्चैव श्रुतोऽनघे । करिष्यन्ति तु यत् प्राप्तं सर्व एव तपोधनाः ।। १२ ।। ‘निष्पाप सरस्वती! हमने शाप और उसका कारण सुन लिया। ये सभी तपोधन इस विषयमें समयोचित कर्तव्यका पालन करेंगे' ।। १२ ।। एवमुक्त्वा सरिच्छ्रेष्ठामूचुस्तेऽथ परस्परम् । विमोचयामहे सर्वे शापादेतां सरस्वतीम् ।। १३ ।। सरिताओंमें श्रेष्ठ सरस्वतीसे ऐसा कहकर वे आपसमें बोले—‘हम सब लोग मिलकर इस सरस्वतीको शापसे छुटकारा दिलावें' ।। १३ ।। ते सर्वे ब्राह्मणा राजंस्तपोभिर्नियमैस्तथा । उपवासैश्च विविधैर्दमैः कष्टव्रतैस्तथा ।। १४ ।। आराध्य पशुभर्तारं महादेवं जगत्पतिम् । तां देवीं मोक्षयामासुः सरिच्छ्रेष्ठां सरस्वतीम् ।। १५ ।। राजन्! उन सभी ब्राह्मणोंने तप, नियम, उपवास, नाना प्रकारके संयम तथा कष्टसाध्य व्रतोंके द्वारा पशुपति विश्वनाथ महादेवजीकी आराधना करके सरिताओंमें श्रेष्ठ उस

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