भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2878

श्रुतमेतन्मया पूर्वं सर्वमेव तपोधन ॥ २४ ॥
विस्तरश्रवणे जातं कौतूहलमतीव मे ।
तब रोहिणीनन्दन बलरामने दीनवाणीमें नारदजीसे पूछा—‘तपोधन! जो राजा लोग वहाँ उपस्थित हुए थे, उन सब क्षत्रियोंकी क्या अवस्था हुई है, यह सब तो मैंने पहले ही सुन लिया था। इस समय कुछ विशेष और विस्तृत समाचार जाननेके लिये मेरे मनमें अत्यन्त उत्सुकता हुई है’ ॥

नारद उवाच
पूर्वमेव हतो भीष्मो द्रोणः सिन्धुपतिस्तथा ॥ २५ ॥
हतो वैकर्तनः कर्णः पुत्राश्चास्य महारथाः ।
भूरिश्रवा रौहिणेय मद्रराजश्च वीर्यवान् ॥ २६ ॥
नारदजीने कहा—रोहिणीनन्दन! भीष्मजी तो पहले ही मारे गये। फिर सिंधुराज जयद्रथ, द्रोण, वैकर्तन कर्ण तथा उसके महारथी पुत्र भी मारे गये हैं। भूरिश्रवा तथा पराक्रमी मद्रराज शल्य भी मार डाले गये ॥

एते चान्ये च बहवस्तत्र तत्र महाबलाः ।
प्रियान् प्राणान् परित्यज्य जयार्थं कौरवस्य वै ॥ २७ ॥
राजानो राजपुत्राश्च समरेष्वनिवर्तिनः ।
ये तथा और भी बहुत-से महाबली राजा और राजकुमार जो युद्धसे पीछे हटनेवाले नहीं थे, कुरुराज दुर्योधनकी विजयके लिये अपने प्यारे प्राणोंका परित्याग करके स्वर्गलोकमें चले गये हैं ॥ २७ १/२ ॥

अहतांस्तु महाबाहो शृणु मे तत्र माधव ॥ २८ ॥
धार्तराष्ट्रबले शेषास्त्रयः समितिमर्दनाः ।
कृपश्च कृतवर्मा च द्रोणपुत्रश्च वीर्यवान् ॥ २९ ॥
महाबाहु माधव! जो वहाँ नहीं मारे गये हैं, उनके नाम भी मुझसे सुन लो। दुर्योधनकी सेनामें कृपाचार्य, कृतवर्मा और पराक्रमी द्रोणपुत्र अश्वत्थामा—ये शत्रुदलका मर्दन करनेवाले तीन ही वीर शेष रह गये हैं ॥ २८-२९ ॥

तेऽपि वै विद्रुता राम दिशो दश भयात् तदा ।
दुर्योधने हते शल्ये विद्रुतेषु कृपादिषु ॥ ३० ॥
ह्रदं द्वैपायनं नाम विवेश भृशदुःखितः ।
परंतु बलरामजी! जब शल्य मारे गये, तब ये तीनों भी भयके मारे सम्पूर्ण दिशाओंमें पलायन कर गये थे। शल्यके मारे जाने और कृप आदिके भाग जानेपर दुर्योधन बहुत दुःखी हुआ और भागकर द्वैपायनसरोवरमें जा छिपा ॥ ३० १/२ ॥

शयानं धार्तराष्ट्रं तु सलिले स्तम्भिते तदा ॥ ३१ ॥