महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ
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२९- युधिष्ठिरद्वारा शल्यपर शक्तिका घातक प्रहार ३०- श्रीकृष्ण दुर्योधनकी ओर संकेत करते हुए उसे मारनेके लिये अर्जुनको प्रेरित कर रहे हैं ३१- विश्रामके लिये सरोवरमें छिपे हुए दुर्योधन ३२- पाण्डवोंद्वारा बलरामजीकी पूजा ३३- दुर्योधन और भीमका गदायुद्ध ३४- युद्धके अन्तमें अर्जुनके रथका दाह ३५- अश्वत्थामा एवं अर्जुनके छोड़े हुए ब्रह्मास्त्रोंको शान्त करनेके लिये नारदजी और व्यासजीका आगमन ३६- व्यासजी गान्धारीको समझा रहे हैं ३७- युद्धमें काम आये हुए वीरोंको उनके सम्बन्धियोंद्वारा जलदान