महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 321, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंविजय पानेकी इच्छा रखनेवाला, सम्पूर्ण धनुर्धरोंमें मानी, अस्त्रवेत्ताओंमें श्रेष्ठ, परशुरामजीके शिष्य और प्रतापी वीर कर्णने अपने उत्तम अस्त्रोंका प्रदर्शन करते हुए सैकड़ों बाणोंद्वारा शत्रुदुर्जय सुभद्रकुमार अभिमन्युको बींध डाला और समरांगणमें उसे पीड़ा देना आरम्भ किया ।। २९-३० ।।
स तथा पीड्यमानस्तु राधेयेनास्त्रवृष्टिभिः ।। ३१ ।।
समरेऽमरसंकाशः सौभद्रो न व्यशीर्यत ।
कर्णके द्वारा उसकी अस्त्रवर्षासे पीड़ित होनेपर भी देवतुल्य अभिमन्यु समरभूमिमें शिथिल नहीं हुआ ।। ३१ १/२ ।।
ततः शिलाशितैस्तीक्ष्णैर्भल्लैरानतपर्वभिः ।। ३२ ।।
छित्त्वा धनूंषि शूराणामार्जुनिः कर्णमर्दयत् ।
तत्पश्चात् अर्जुनकुमारने सानपर चढ़ाकर तेज किये हुए झुकी हुई गाँठवाले तीखे भल्लोंद्वारा शूरवीरोंके धनुष काटकर कर्णको सब ओरसे पीड़ा दी ।। ३२ १/२ ।।
धनुर्मण्डलनिर्मुक्तैः शरैराशीविषोपमैः ।। ३३ ।।
सच्छत्रध्वजयन्तारं साश्वमाशु स्मयन्निव ।
उसने मुसकराते हुए-से अपने मण्डलाकार धनुषसे छूटे हुए विषधर सर्पोंके समान भयानक बाणोंद्वारा छत्र, ध्वज, सारथि और घोड़ोंसहित कर्णको शीघ्र ही घायल कर दिया ।। ३३ १/२ ।।
कर्णोऽपि चास्य चिक्षेप बाणान् संनतपर्वणः ।। ३४ ।।
असम्भ्रान्तश्च तान् सर्वानगृह्णात् फाल्गुनात्मजः ।
कर्णने भी उसके ऊपर झुकी हुई गाँठवाले बहुत-से बाण चलाये; परंतु अर्जुनकुमारने उन सबको बिना किसी घबराहटके सह लिया ।। ३४ १/२ ।।
ततो मुहूर्तात् कर्णस्य बाणेनैकेन वीर्यवान् ।। ३५ ।।
सध्वजं कार्मुकं वीरश्छित्त्वा भूमावपातयत् ।
तदनन्तर दो ही घड़ीमें पराक्रमी वीर अभिमन्युने एक बाण मारकर कर्णके ध्वजसहित धनुषको पृथ्वीपर काट गिराया ।। ३५ १/२ ।।
ततः कृच्छ्रगतं कर्णं दृष्ट्वा कर्णादनन्तरः ।। ३६ ।।
सौभद्रमभ्ययात् तूर्णं दृढमुद्यम्य कार्मुकम् ।
तत उच्चुक्रुशुः पार्थास्तेषां चानुचरा जनाः ।
वादित्राणि च संजघ्नुः सौभद्रं चापि तुष्टुवुः ।। ३७ ।।
कर्णको संकटमें पड़ा देख उसका छोटा भाई सुदृढ़ धनुष हाथमें लेकर तुरंत ही सुभद्राकुमारका सामना करनेके लिये आ पहुँचा। उस समय कुन्तीके सभी पुत्र और उनके