महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 3224, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्राह्मणी तपके लिये, गाय बोझ ढोनेके लिये, घोड़ी वेगसे दौड़नेके लिये, शूद्रा सेवाके लिये, वैश्य-कन्या पशु-पालन करनेके लिये और तुम-जैसी राजपुत्री युद्धमें लड़कर मरनेके लिये पुत्र पैदा करती है ॥ ५ ॥
वैशम्पायन उवाच
तच्छ्रुत्वा वासुदेवस्य पुनरुक्तं वचोऽप्रियम् ।
तूष्णीं बभूव गान्धारी शोकव्याकुललोचना ॥ ६ ॥
**वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! श्रीकृष्णका दुबारा कहा हुआ वह अप्रिय वचन सुनकर गान्धारी चुप हो गयी। उसके नेत्र शोकसे व्याकुल हो उठे थे ॥ ६ ॥
धृतराष्ट्रस्तु राजर्षिर्निगृह्याबुद्धिजं तमः ।
पर्यपृच्छत धर्मज्ञो धर्मराजं युधिष्ठिरम् ॥ ७ ॥
उस समय धर्मज्ञ राजर्षि धृतराष्ट्रने अज्ञानसे उत्पन्न होनेवाले शोक और मोहको रोककर धर्मराज युधिष्ठिरसे पूछा— ॥ ७ ॥
जीवतां परिमाणज्ञः सैन्यानामसि पाण्डव ।
हतानां यदि जानीषे परिमाणं वदस्व मे ॥ ८ ॥
‘पाण्डुनन्दन! तुम जीवित सैनिकोंकी संख्याके जानकार तो हो ही। यदि मरे हुओंकी संख्या जानते हो तो मुझे बताओ ॥ ८ ॥
युधिष्ठिर उवाच
दशायुतानामयुतं सहस्राणि च विंशतिः ।
कोट्यः षष्टिश्च षट् चैव ह्यस्मिन् राजन् मृधे हताः ॥ ९ ॥
**युधिष्ठिर बोले—**राजन्! इस युद्धमें एक अरब, छाछठ करोड़, बीस हजार योद्धा मारे गये हैं ॥ ९ ॥
अलक्षितानां वीराणां सहस्राणि चतुर्दश ।
दश चान्यानि राजेन्द्र शतं षष्टिश्च पञ्च च ॥ १० ॥
राजेन्द्र! इनके अतिरिक्त चौबीस हजार एक सौ पैंसठ सैनिक लापता है ॥ १० ॥
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिर गतिं कां ते गताः पुरुषसत्तम ।
आचक्ष्व मे महाबाहो सर्वज्ञो ह्यसि मे मतः ॥ ११ ॥
**धृतराष्ट्रने पूछा—**पुरुषप्रवर! महाबाहु युधिष्ठिर! तुम तो मुझे सर्वज्ञ जान पड़ते हो; अतः यह तो बताओ कि ‘वे मरे हुए सैनिक किस गतिको प्राप्त हुए हैं?’ ॥
युधिष्ठिर उवाच
यैर्हुतानि शरीराणि हृष्टैः परमसंयुगे ।