महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउस समय जयद्रथने पलक मारते-मारते दूसरा धनुष हाथमें लेकर युधिष्ठिरको दस तथा अन्य वीरोंको तीन-तीन बाणोंसे बींध डाला ।। ११ ।।
तत् तस्य लाघवं ज्ञात्वा भीमो भल्लैस्त्रिभिस्त्रिभिः । धनुर्ध्वजं च च्छत्रं च क्षितौ क्षिप्रमपातयत् ।। १२ ।। उसकी इस फुर्तीको देख और समझकर भीमसेनने तीन-तीन भल्लोंद्वारा उसके धनुष, ध्वज और छत्रको शीघ्र ही पृथ्वीपर काट गिराया ।। १२ ।।
सोऽन्यदादाय बलवान् सज्यं कृत्वा च कार्मुकम् । भीमस्यापातयत् केतुं धनुश्वांश्च मारिष ।। १३ ।। आर्य! तब उस बलवान् वीरने दूसरा धनुष ले उसपर प्रत्यंचा चढ़ाकर भीमके धनुष, ध्वज और घोड़ोंको धराशायी कर दिया ।। १३ ।।
स हताश्वादवप्लुत्य च्छिन्नधन्वा रथोत्तमात् । सात्यकेराप्लुतो यानं गिर्यग्रमिव केसरी ।। १४ ।।