महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 375, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंयो हि भोज्ये पुरस्कार्यो यानेषु शयनेषु च । भूषणेषु च सोऽस्माभिर्बालो युधि पुरस्कृतः ॥ १२ ॥ ‘हाय! जिस सुकुमार बालकको भोजन और शयन करने, सवारीपर चलने तथा भूषण, वस्त्र पहननेमें आगे रखना चाहिये था, उसे हमलोगोंने युद्धमें आगे कर दिया ॥
कथं हि बालस्तरुणो युद्धानामविशारदः । सदश्व इव सम्बाधे विषमे क्षेममर्हति ॥ १३ ॥ ‘वह तरुणकुमार अभी बालक था। युद्धकी कलामें पूरा प्रवीण नहीं हुआ था। फिर गहन वनमें फँसे हुए सुन्दर अश्वकी भाँति वह उस विषम संग्राममें कैसे सकुशल रह सकता था? ॥ १३ ॥
नो चेद्धि वयमप्येनं महीमनु शयीमहि । बीभत्सोः कोपदीप्तस्य दग्धाः कृपणचक्षुषा ॥ १४ ॥ ‘यदि हमलोग अभिमन्युके साथ ही उस रण-क्षेत्रमें शयन न कर सके तो अब क्रोधसे उत्तेजित हुए अर्जुनके शोकाकुल नेत्रोंसे हमें अवश्य दग्ध होना पड़ेगा ॥ १४ ॥
अलुब्धो मतिमान् ह्रीमान् क्षमावान् रूपवान् बली । वपुष्मान् मानकृद् वीरः प्रियः सत्यपराक्रमः ॥ १५ ॥ यस्य श्लाघन्ति विबुधाः कर्माण्यूर्जितकर्मणः । निवातकवचाञ्जघ्ने कालकेयांश्च वीर्यवान् ॥ १६ ॥ महेन्द्रशत्रवो येन हिरण्यपुरवासिनः । अक्ष्णोर्निमेषमात्रेण पौलोमाः सगणा हताः ॥ १७ ॥ परेभ्योऽप्यभयार्थिभ्यो यो ददात्यभयं विभुः । तस्यास्माभिर्न शक्तितस्त्रातुमप्यात्मजो बली ॥ १८ ॥ ‘जो लोभरहित, बुद्धिमान्, लज्जाशील, क्षमावान्, रूपवान्, बलवान्, सुन्दर शरीरधारी, दूसरोंको मान देनेवाले, प्रीतिपात्र, वीर तथा सत्यपराक्रमी हैं, जिनके कर्मोंकी देवतालोग भी प्रशंसा करते हैं, जिनके कर्म सबल एवं महान् हैं, जिन पराक्रमी वीरने निवातकवचों तथा कालकेय नामक दैत्योंका विनाश किया था, जिन्होंने आँखोंकी पलक मारते-मारते हिरण्यपुरनिवासी इन्द्रशत्रु पौलोम नामक दानवोंका उनके गणोंसहित संहार कर डाला था तथा जो सामर्थ्यशाली अर्जुन अभयकी इच्छा रखनेवाले शत्रुओंको भी अभयदान देते हैं, उन्हींके बलवान् पुत्रकी भी हमलोग रक्षा नहीं कर सके ॥ १५–१८ ॥
भयं तु सुमहत् प्राप्तं धार्तराष्ट्रान् महाबलान् । पार्थः पुत्रवधात् क्रुद्धः कौरवाञ्शोषयिष्यति ॥ १९ ॥ ‘अहो! महाबली धृतराष्ट्रपुत्रोंपर बड़ा भारी भय आ पहुँचा है; क्योंकि अपने पुत्रके वधसे कुपित हुए कुन्तीकुमार अर्जुन कौरवोंको सोख लेंगे—उनका मूलोच्छेद कर डालेंगे ॥ १९ ॥