महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 616, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंमान्यवर! तब अर्जुनने कंककी पाँखोंवाले तीखे बाणोंद्वारा विजयके लिये प्रयत्न करनेवाले अम्बष्ठके घोड़ोंको शीघ्र ही मार गिराया ।। ६१ ।। धनुश्चास्यापरैश्छित्त्वा शरैः पार्थो विचक्रमे । अम्बष्ठस्तु गदां गृह्य कोपपर्याकुलेक्षणः ।। ६२ ।। आससाद रणे पार्थं केशवं च महारथम् । फिर दूसरे बाणोंसे उसके धनुषको भी काटकर पार्थने विशेष बल-विक्रमका परिचय दिया। तब अम्बष्ठकी आँखें क्रोधसे व्याप्त हो गयीं। उसने गदा लेकर रणक्षेत्रमें महारथी श्रीकृष्ण और अर्जुनपर आक्रमण किया ।। ६२ ½ ।। ततः सम्प्रहरन् वीरो गदामुद्यम्य भारत ।। ६३ ।। रथमावार्य गदया केशवं समताडयत् । भारत! तदनन्तर वीर अम्बष्ठने प्रहार करनेके लिये उद्यत हो गदा उठाये आगे बढ़कर अर्जुनके रथको रोक दिया और भगवान् श्रीकृष्णपर गदासे आघात किया ।। ६३ ½ ।। गदया ताडितं दृष्ट्वा केशवं परवीरहा ।। ६४ ।। अर्जुनोऽथ भृशं क्रुद्धः सोऽम्बष्ठं प्रति भारत । भरतनन्दन! शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले अर्जुन भगवान् श्रीकृष्णको गदासे आहत हुआ देख अम्बष्ठके प्रति अत्यन्त कुपित हो उठे ।। ६४ ½ ।। ततः शरैर्हेमपुङ्खैः सगदं रथिनां वरम् ।। ६५ ।। छादयामास समरे मेघः सूर्यमिवोदितम् । फिर तो जैसे बादल उदित हुए सूर्यको ढक लेता है, उसी प्रकार अर्जुनने समरांगणमें सोनेके पंखवाले बाणोंद्वारा गदासहित रथियोंमें श्रेष्ठ अम्बष्ठको आच्छादित कर दिया ।। ६५ ½ ।। अथापरैः शरैश्चापि गदां तस्य महात्मनः ।। ६६ ।। अचूर्णयत् तदा पार्थस्तदद्भुतमिवाभवत् । तत्पश्चात् दूसरे बहुत-से बाण मारकर अर्जुनने महामना अम्बष्ठकी उस गदाको उसी समय चूर-चूर कर दिया। वह अद्भुत-सी घटना हुई ।। ६६ ½ ।। अथ तां पतितां दृष्ट्वा गृह्यान्यां च महागदाम् ।। ६७ ।। अर्जुनं वासुदेवं च पुनः पुनरताडयत् । उस गदाको गिरी हुई देख अम्बष्ठने दूसरी विशाल गदा ले ली और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनपर बारंबार प्रहार किया ।। ६७ ½ ।। तस्यार्जुनः क्षुरप्राभ्यां सगदावुद्यतौ भुजौ ।। ६८ ।। चिच्छेदेन्द्रध्वजाकारौ शिरश्चान्येन पत्रिणा ।