भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 706, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 706

फिर एक भल्ल चलाकर उनका धनुष काट दिया। एक भल्लसे इन्द्रध्वजके समान उनकी ध्वजा खण्डित कर दी और तीन बाणोंसे पाण्डुपुत्र युधिष्ठिरको भी पीड़ा पहुँचायी ॥ ४१ १/२ ॥ हताश्वात् तु रथात् तूर्णमवप्लुत्य युधिष्ठिरः ॥ ४२ ॥ तस्थावूर्ध्वभुजो राजा व्यायुधो भरतर्षभ । भरतश्रेष्ठ! जिसके घोड़े मारे गये थे, उस रथसे तुरंत ही कूदकर राजा युधिष्ठिर बिना आयुधके हाथ ऊपर उठाये धरतीपर खड़े हो गये ॥ ४२ १/२ ॥ विरथं तं समालोक्य व्यायुधं च विशेषतः ॥ ४३ ॥ द्रोणो व्यमोहयच्छत्रून् सर्वसैन्यानि वा विभो । प्रभो! उन्हें रथ और विशेषतः आयुधसे रहित देख द्रोणाचार्यने शत्रुओं तथा उनकी सम्पूर्ण सेनाओंको मोहित कर दिया ॥ ४३ १/२ ॥ मुञ्चञ्छ्रेषुगणांस्तीक्ष्णाँल्लघुहस्तो दृढव्रतः ॥ ४४ ॥ अभिदुद्राव राजानं सिंहो मृगमिवोल्बणः । दृढ़तापूर्वक व्रतका पालन करनेवाले द्रोणके हाथ बड़ी फुर्तीसे चलते थे। जैसे प्रचण्ड सिंह किसी मृगका पीछा करता हो, उसी प्रकार वे तीखे बाणसमूहोंकी वर्षा करते हुए राजा युधिष्ठिरकी ओर दौड़े ॥ ४४ १/२ ॥ तमभिद्रुतमालोक्य द्रोणेनामित्रघातिना ॥ ४५ ॥ हाहेति सहसा शब्दः पाण्डूनां समजायत । शत्रुनाशक द्रोणाचार्यके द्वारा युधिष्ठिरका पीछा होता देख पाण्डवदलमें सहसा हाहाकार मच गया ॥ ४५ १/२ ॥ हतो राजा हतो राजा भारद्वाजेन मारिष ॥ ४६ ॥ इत्यासीत् सुमहाञ्छब्दः पाण्डुसैन्यस्य भारत । भारत! माननीय नरेश! पाण्डुसेनामें यह महान् कोलाहल होने लगा कि ‘राजा मारे गये, राजा मारे गये’ ॥ ततस्त्वरितमारुह्य सहदेवरथं नृपः । अपायाज्जवनैरश्वैः कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ॥ ४७ ॥ तदनन्तर कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर तुरंत ही सहदेवके रथपर आरूढ़ हो अपने वेगशाली घोड़ोंद्वारा वहाँसे हट गये ॥ ४७ ॥

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि युधिष्ठिरापयाने षडधिकशततमोऽध्यायः ॥ १०६ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें युधिष्ठिरका पलायनविषयक एक सौ छवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १०६ ॥

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व · पृष्ठ 706, कुल 3237 में से · BharatKosha