महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 782, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहारथी कृतवर्माने पाण्डवोंको जीतकर चेदिदेशीय सैनिकोंको परास्त किया, फिर पांचालों, सृंजयों और महापराक्रमी केकयोंको भी हरा दिया ॥ १०० ॥
ते वध्यमानाः समरे हार्दिक्येन स्म पाण्डवाः । इतश्चेतश्च धावन्तो नैव चक्रुर्धृतिं रणे ॥ १०१ ॥
समरांगणमें कृतवर्माके बाणोंकी मार खाकर पाण्डव-सैनिक इधर-उधर भागने लगे। वे रणभूमिमें कहीं भी स्थिर न हो सके ॥ १०१ ॥
जित्वा पाण्डुसुतान् युद्धे भीमसेनपुरोगमान् । हार्दिक्यः समरेऽतिष्ठद् विधूम इव पावकः ॥ १०२ ॥
युद्धमें भीमसेन आदि पाण्डवोंको जीतकर कृतवर्मा उस रणक्षेत्रमें धूमरहित अग्निके समान शोभा पाता हुआ खड़ा था ॥ १०२ ॥
ते द्राव्यमाणाः समरे हार्दिक्येन महारथाः । विमुखाः समपद्यन्त शरवृष्टिभिरार्दिताः ॥ १०३ ॥
समरांगणमें कृतवर्माके द्वारा खदेड़े गये और उसकी बाण-वर्षासे पीड़ित हुए पूर्वोक्त सभी महारथियोंने युद्धसे मुँह मोड़ लिया ॥ १०३ ॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यकिप्रवेशे कृतवर्मपराक्रमे चतुर्दशाधिकशततमोऽध्यायः ॥ ११४ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकिका कौरव-सेनामें प्रवेश तथा कृतवर्माका पराक्रमविषयक एक सौ चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ११४ ॥