भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 886, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 886

जैसे पत्थरोंकी वर्षा ग्रहण करते हुए पर्वतको कोई पीड़ा नहीं होती, उसी प्रकार शत्रुसूदन पाण्डुपुत्र भीमसेन उस बाण-वर्षाको सहन करते हुए भी व्यथित नहीं हुए ।।
विन्दानुविन्दौ सहितौ सुवर्माणं च ते सुतम् ।
प्रहसन्नेव कौन्तेयः शरैरनिन्ये यमक्षयम् ।। ६६ ।।
कुन्तीनन्दन भीमने हँसते हुए ही अपने बाणोंद्वारा एक साथ आये हुए दोनों भाई विन्द और अनुविन्दको तथा आपके पुत्र सुवर्माको भी यमलोक पहुँचा दिया ।।
ततः सुदर्शनं वीरं पुत्रं ते भरतर्षभ ।
विव्याध समरे तूर्णं स पपात ममार च ।। ६७ ।।
भरतश्रेष्ठ! तदनन्तर उन्होंने समरभूमिमें आपके वीर पुत्र सुदर्शन (उर्णनाभ) को घायल कर दिया। इससे वह तुरंत ही गिरा और मर गया ।। ६७ ।।
सोऽचिरेणैव कालेन तद्रथानीकमाशुगैः ।
दिशः सर्वाः समालोक्य व्यधमत् पाण्डुनन्दनः ।। ६८ ।।
इस प्रकार पाण्डुनन्दन भीमसेनने सम्पूर्ण दिशाओंमें दृष्टिपात करके अपने बाणोंद्वारा थोड़े ही समयमें उस रथसेनाको नष्ट कर दिया ।। ६८ ।।
ततो वै रथघोषेण गर्जितेन मृगा इव ।
भज्यमानाश्च समरे तव पुत्रा विशाम्पते ।। ६९ ।।
प्रजानाथ! तदनन्तर भीमसेनके रथकी घरघराहट और गर्जनासे समरांगणमें मृगोंके समान भयभीत हुए आपके पुत्रोंका उत्साह भंग हो गया ।। ६९ ।।
प्राद्रवन् सहसा सर्वे भीमसेनभयार्दिताः ।
अनुयायाच्च कौन्तेयः पुत्राणां ते महद् बलम् ।। ७० ।।
वे सब-के-सब भीमसेनके भयसे पीड़ित हो सहसा भाग खड़े हुए। कुन्तीकुमार भीमसेनने आपके पुत्रोंकी विशाल सेनाका दूरतक पीछा किया ।। ७० ।।
विव्याध समरे राजन् कौरवेयान् समन्ततः ।
वध्यमाना महाराज भीमसेनेन तावकाः ।। ७१ ।।
त्यक्त्वा भीमं रणाज्जग्मुश्चोदयन्तो हयोत्तमान् ।
राजन्! उन्होंने रणक्षेत्रमें सब ओर कौरवोंको घायल किया। महाराज! भीमसेनके द्वारा मारे जाते हुए आपके सभी पुत्र उन्हें छोड़कर अपने उत्तम घोड़ोंको हाँकते हुए रणभूमिसे दूर चले गये ।। ७१ १/२ ।।
तांस्तु निर्जित्य समरे भीमसेनो महाबलः ।। ७२ ।।
सिंहनादरवं चक्रे बाहुशब्दं च पाण्डवः ।

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