भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 894

'जिसने महासमरमें अपने बाहुबलसे चौदह हजार कालकेय नामक दैत्योंका वध किया था, वह अर्जुन हमारे भाग्यसे जीवित है॥ ४६॥ गन्धर्वराजं बलिनं दुर्योधनकृते च वै। जितवान् योऽस्त्रवीर्येण दिष्ट्या पार्थः स जीवति॥ ४७॥ 'जिसने अपने अस्त्र-बलसे दुर्योधनके लिये बलवान् गन्धर्वराज चित्रसेनको परास्त किया था, वह पार्थ सौभाग्यवश जीवित है॥ ४७॥ किरीटमाली बलवान् श्वेताश्वः कृष्णसारथिः। मम प्रियश्च सततं दिष्ट्या पार्थः स जीवति॥ ४८॥ 'जिसके मस्तकपर किरीट शोभा पाता है, जिसके रथमें श्वेत घोड़े जोते जाते हैं, भगवान् श्रीकृष्ण जिसके सारथि हैं तथा जो सदा ही मुझे प्रिय लगता है, वह बलवान् अर्जुन अभी जीवित है, यह सौभाग्यकी बात है॥ ४८॥ पुत्रशोकाभिसंतप्तश्चिकीर्षन् कर्म दुष्करम्। जयद्रथवधान्वेषी प्रतिज्ञां कृतवान् हि यः॥ ४९॥ कच्चित् स सैन्धवं संख्ये हनिष्यति धनंजयः। कच्चित् तीर्णप्रतिज्ञं हि वासुदेवेन रक्षितम्॥ ५०॥ अनस्तमित आदित्ये समेष्याम्यहमर्जुनम्। 'जिसने पुत्रशोकसे संतप्त हो दुष्कर कर्म करनेकी इच्छा रखकर जयद्रथके वधकी अभिलाषासे भारी प्रतिज्ञा कर ली है, वह अर्जुन क्या आज युद्धमें सिंधुराजको मार डालेगा? क्या सूर्यास्त होनेसे पहले ही प्रतिज्ञा पूर्ण करके लौटे हुए, भगवान् श्रीकृष्णद्वारा सुरक्षित अर्जुनसे मैं मिल सकूँगा?॥ ४९-५० १/२॥ कच्चित् सैन्धवको राजा दुर्योधनहिते रतः॥ ५१॥ नन्दयिष्यत्यमित्रान् हि फाल्गुनेन निपातितः। 'क्या दुर्योधनके हितमें तत्पर रहनेवाला राजा जयद्रथ अर्जुनके हाथसे मारा जाकर शत्रुपक्षको आनन्दित करेगा?॥ ५१ १/२॥ कच्चिद् दुर्योधनो राजा फाल्गुनेन निपातितम्॥ ५२॥ दृष्ट्वा सैन्धवकं संख्ये शममस्मासु धास्यति। 'क्या युद्धमें सिंधुराजको अर्जुनके हाथसे मारा गया देखकर राजा दुर्योधन हमारे साथ संधि कर लेगा?॥ ५२ १/२॥ दृष्ट्वा विनिहतान् भ्रातृन् भीमसेनेन संयुगे॥ ५३॥ कच्चिद् दुर्योधनो मन्दः शममस्मासु धास्यति। 'क्या मूर्ख दुर्योधन संग्रामभूमिमें भीमसेनके हाथसे अपने भाइयोंका वध होता देखकर हमारे साथ संधि कर लेगा?॥ ५३ १/२॥ दृष्ट्वा चान्यान् महायोधान् पातितान् धरणीतले।