भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 899

तं कर्णश्छादयामास शरव्रातैरनेकंशः । संछाद्यमानः कर्णेन बहुधा पाण्डुनन्दनः ॥ २४ ॥ चिच्छेद चापं कर्णस्य मुष्टिदेशे महारथः । विव्याध चैनं बहुभिः सायकैर्नतपर्वभिः ॥ २५ ॥ तब कर्णने अनेकों बार बाणसमूहोंकी वर्षा करके भीमसेनको आच्छादित कर दिया। कर्णके द्वारा बारंबार अच्छादित होते हुए पाण्डुनन्दन महारथी भीमने कर्णके धनुषको मुट्ठी पकड़नेकी जगहसे काट दिया और झुकी हुई गाँठवाले बहुत-से बाणोंद्वारा उसे घायल कर दिया ॥ २४-२५ ॥

अथान्यद् धनुरदाय सज्यं कृत्वा च सूतजः । विव्याध समरे भीमं भीमकर्मा महारथः ॥ २६ ॥ तत्पश्चात् भयंकर कर्म करनेवाले महारथी सूतपुत्र कर्णने दूसरा धनुष लेकर उसपर प्रत्यंचा चढ़ायी और समरभूमिमें भीमसेनको घायल कर दिया ॥ २६ ॥

तस्य भीमो भृशं क्रुद्धस्त्रीन् शरान् नतपर्वणः । निचखानोरसि क्रुद्धः सूतपुत्रस्य वेगतः ॥ २७ ॥ तब भीमसेनको बड़ा क्रोध हुआ। उन्होंने वेगपूर्वक सूतपुत्रकी छातीमें झुकी हुई गाँठवाले तीन बाण धँसा दिये ॥ २७ ॥

तैः कर्णोऽराजत शरैरुरोमध्यगतैस्तदा । महीधर इवोदग्रस्त्रिशृङ्गो भरतर्षभ ॥ २८ ॥ भरतश्रेष्ठ! ठीक छातीके बीचमें गड़े हुए उन बाणोंद्वारा कर्ण तीन शिखरोंवाले ऊँचे पर्वतके समान सुशोभित हुआ ॥ २८ ॥

सुस्राव चास्य रुधिरं विद्धस्य परमेषुभिः । धातुप्रस्यन्दिनः शैलाद् यथा गैरिकधातवः ॥ २९ ॥ उन उत्तम बाणोंसे बिंधे हुए कर्णकी छातीसे बहुत रक्त गिरने लगा, मानो धातुकी धाराएँ बहानेवाले पर्वतसे गैरिक धातु (गेरू) प्रवाहित हो रहा हो ॥ २९ ॥

किंचिद् विचलितः कर्णः सुप्रहाराभिपीडितः । आकर्णपूर्णमाकृष्य भीमं विव्याध सायकैः ॥ ३० ॥ उस गहरे प्रहारसे पीड़ित हो कर्ण कुछ विचलित हो उठा। फिर धनुषको कानतक खींचकर उसने अनेक बाणोंद्वारा भीमसेनको बींध डाला ॥ ३० ॥

चिक्षेप च पुनर्बाणान् शतशोऽथ सहस्रशः । स शरैरर्दितस्तेन कर्णेन दृढधन्विना । धनुर्ज्यामच्छिनत् तूर्णं भीमस्तस्य क्षुरेण ह ॥ ३१ ॥ तत्पश्चात् उनपर पुनः सैकड़ों और हजारों बाणोंका प्रहार किया। सुदृढ़ धनुर्धर कर्णके बाणोंसे पीड़ित हो भीमसेनने एक क्षुरके द्वारा तुरंत ही उसके धनुषकी प्रत्यंचा काट दी ॥