भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

पृष्ठ 1097, कुल 2450 में से

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पृष्ठ 1097

व्यसने यः परित्यागी दुरात्मा निरपत्रपः ॥ ७ ॥ सर्वतः पापदर्शी च नास्तिको वेदनिन्दकः । सम्पर्कीर्णेन्द्रियो लोके यः कामं निरतश्चरेत् ॥ ८ ॥ असत्यो लोकविद्विष्टः समये चानवस्थितः । पिशुनोऽथाकृतप्रज्ञो मत्सरी पापनिश्चयः ॥ ९ ॥ दुःशीलोऽथाकृतात्मा च नृशंसः कितवस्तथा । मित्रैरपकृतिर्नित्यमिच्छतेऽर्थं परस्य यः ॥ १० ॥ ददतश्च यथाशक्ति यो न तुष्यति मन्दधीः । अधैर्यमपि यो युङ्क्ते सदा मित्रं नरर्षभ ॥ ११ ॥ अस्थानक्रोधनोऽयुक्तो यश्चाकस्माद् विरुध्यते । सुहृदश्चैव कल्याणानाशु त्यजति किल्बिषी ॥ १२ ॥ अल्पेऽप्यपकृते मूढस्तथाज्ञानात् कृतेऽपि च । कार्यसेवी च मित्रेषु मित्रद्वेषी नराधिप ॥ १३ ॥ शत्रुर्मित्रमुखो यश्च जिह्मप्रेक्षी विलोचनः । न विरज्यति कल्याणे यस्त्यजेत् तादृशं नरम् ॥ १४ ॥ पानपो द्वेषणः क्रोधी निर्घृणः परुषस्तथा । परोपतापी मित्रध्रुक् तथा प्राणिवधे रतः ॥ १५ ॥ कृतघ्नश्चाधमो लोके न संधेयः कदाचन । छिद्रान्वेषी ह्यसंधेयः संधेयानपि मे शृणु ॥ १६ ॥

जो लोभी, क्रूर, धर्मत्यागी, कपटी, शठ, क्षुद्र, पापाचारी, सबपर संदेह करनेवाला, आलसी, दीर्घसूत्री, कुटिल, निन्दित, गुरुपत्नीगामी, संकटके समय साथ छोड़कर चल देनेवाला, दुरात्मा, निर्लज्ज, सब ओर पापपूर्ण दृष्टि डालनेवाला, नास्तिक, वेदोंकी निन्दा करनेवाला, इन्द्रियोंको खुला छोड़कर जगत्‌में इच्छानुसार विचरनेवाला, झूठा, सबके द्वेषका पात्र, अपनी प्रतिज्ञापर स्थिर न रहनेवाला, चुगलखोर, अपवित्र बुद्धिवाला, ईर्ष्यालु, पापपूर्ण विचार रखनेवाला, दुष्ट स्वभाववाला, मनको वशमें न रखनेवाला, नृशंस, धूर्त, मित्रोंकी बुराई करनेवाला, सदा दूसरोंका धन लेनेकी इच्छा रखनेवाला, यथाशक्ति देनेवालेपर भी संतुष्ट न रहनेवाला, मन्दबुद्धि, मित्रको भी सदा धैर्यसे विचलित करनेवाला, असावधान, बेमौके क्रोध करनेवाला, अकस्मात् विरोधी होकर कल्याणकारी सुहृदोंको भी शीघ्र ही त्याग देनेवाला, अनजानमें थोड़ा-सा भी अपराध बन जानेपर मित्रका अनिष्ट करनेवाला, पापी, अपना काम बनानेके लिये ही मित्रोंसे मेल रखनेवाला, वास्तवमें मित्रद्वेषी, मुखसे मित्रताकी बातें करके भीतरसे शत्रुभाव रखनेवाला, कुटिल दृष्टिसे देखनेवाला, विपरीतदर्शी, भलाईसे कभी पीछे न हटनेवाले मित्रको भी त्याग देनेवाला, शराबी, द्वेषी, क्रोधी, निर्दयी, क्रूर, दूसरोंको सतानेवाला, मित्रद्रोही, प्राणियोंकी हिंसामें